शिक्षा जगत एवं उद्धयोग के परस्पर सहयोग से न्यूनतम मूल्य पर नवीनतम औषधी के निर्माण पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया I
स्मृति कॉलेज ऑफ़ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन , इंदौर मे विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) एवं प्रबंधन एवं सूचना प्रणाली (NSTMIS) द्वारा SPAICS (स्टेकहोल्डर कार्यशाला ) का आयोजन २८ सितम्बर २०१९ को किया गया I
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-डा नीलेश मालवीय- ------ |
इस कार्यशाला में अतिथीगड़ डॉक्टर सरनजीत सिंह (प्रोफेसर एवं हेड ऑफ़ डिपार्टमेंट ऑफ़ फार्मास्यूटिकल एनालिसिस ,पंजाब ),डॉक्टर डी. के. जैन (डायरेक्टर, कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी , आई. पी. एश.अकेडमी, इंदौर ), डॉक्टर संजय कुमार जैन (प्रोफेसर एंड हेड ऑफ़ डिपार्मेंट ऑफ़ फार्मास्यूटिकल साइंसेज, डॉक्टर एच .ऐश. गौर विश्वविद्यालय सागर) डॉक्टर पी. के. दुबे (प्रिंसिपल ,स्वामी विवेकानंद कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी ,इंदौर) डॉ. एस. बी. रिजवानी (मैनेजिंग डायरेक्टर,प्रोमेड लैबोरेट्रीज, प्राइवेट लिमिटेड, इंदौर),श्रीमान सुधीर वोरा (मैनेजिंग डायरेक्टर,ज़ेस्ट फार्मसूटिकट ,इंदौर) डॉक्टर अमित जैन (प्रिंसिपल बी.र. नाहटा कॉलेज ऑफ़ फार्मेसी, मंदसौर),श्रीमान संजय ज्ञानी (मैनेजिंग डायरेक्टर, अल्केमी केमिकल्स, उज्जैन) ने इस कार्यशाला में अपनी शिरकत किया Iअतिथिगनो का सम्मान कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. नीलेश मालवीय द्वारा किया गया I और इन्होने इस कार्यशाला को करवाने के उद्देश्य को विस्तार पूर्वक बताया और ये आश्वासन दिया की आगे भी कॉलेज इसी तरह अपने निरंतर प्रयासों द्वारा फार्मा से जुड़े शिक्षकगणों एवं फार्मा उद्योग के मध्य सहजीवी भूमिका निभाता रहेगा I इस कार्यशाला में पधारे अतिथि डॉ सरनजीत सिंह (प्रोफेसर एवं हेड ऑफ़ डिपार्टमेंट ऑफ़ फार्मास्यूटिकल एनालिसिस ,पंजाब ) ने उद्भोदित किया की शिक्षकगणों एवं फार्मा उद्योग अपने परस्पर समन्वय से उच्चकोटि के उत्पाद शामिल हों I वार्ता को आगे बढ़ाते हुए डॉ संजय कुमार जैन (प्रोफेसर एंड हेड ऑफ़ डिपार्मेंट ऑफ़ फार्मास्यूटिकल साइंसेज, डॉक्टर एच . एस. गौर विश्वविद्यालय सागर)ने बताया जिसमे फार्मा क्षेत्र से शिक्षगण एवं फार्मा उधयोगपतियो ने आपस में अपने विचार विमर्श किया जिसमे उन्होने यह बताया की फार्मा शिक्षा प्रणाली कुछ इस तरह हो जिसमे छात्रों का सर्वांगिक व्यावहारिक कौशल विकसित हो एवं छात्र अपना अधिकतम ज्ञान नए-नए उत्पादों को विकसित करने में उपयोग लाय जिससे फार्मा उद्योग को नवीनतम ऊचाइयों पर ले जा सके I डॉ संजय ज्ञानी (मैनेजिंग डायरेक्टर, अल्केमी केमिकल्स,, उज्जैन) ने बताया की हम छात्रों को इस प्रकार शिक्षित करे की जब वे उद्योग में जाये तो जल्द ही अपने आप को उसके अनुरूप ढाल ले और अपने नए विचारो से उच्चतम कोटि की उत्पाद उत्पन्न कर सके I इस कार्यशाला में देश के विभिन्न प्रदेश जैसे गुजरात, महाराष्ट्र ,विहार ,तमिलनाडु , कर्नाटक , मध्यप्रदेश आदि से ४०० से ज्यादा प्रख्यात अकडमीशन प्रतिभागी कार्यशाला में शामिल हुए I यह कार्यशाला चार चरणों में संपन्न की जाएगी I प्रथम चरण में आमंत्रित वार्ता के द्वारा चर्चा किये गये उद्देश्य निश्चित रूप से एकेडेमिया उद्धयोग सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रासंगिक दिशा प्रदान करेगा I
द्वितीय चरण में विशेषण वार्ता हुई, जिसमे विशेषज्ञों ने एकेडेमिक इंडस्ट्री सहयोग पर उभरती प्रवृतियों पर चर्चा की और यह भी उद्बोधित किया की कैसे एकेडेमिआ उद्योग सहयोग को मजबूती प्रदान करे की जिससे दोनों के आपसी फायदे हो सके , और साथ ही आर एन्ड डी (R&D) तथा परामर्श को उद्योग तथा शैक्षणिक संसथान के बीच प्रभावी रूप से क्रियान्वित किया जाये I विशेषज्ञों ने देश में अब तक हुई उद्योग एकेडेमिआ की सफलतम कहानियो का वर्णन किया गया जिसमें आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिए शैक्षिक पुरुस्कार संरचना को उन्नयन करने पर विचार किया गया I तृतीय चरण में समिति चर्चा की गयी, जिसमे कुछ महत्वपूर्ण बिन्दुओ पर उपस्थित गणमान्य अतिथियों द्वारा विचार विमर्श किया गया I किस प्रकार शिक्षा एवं उद्योग एक दूसरे की सहायता से अपने उद्देश्यों को नवीनतम विचारो और नवोन्मेष में रूपांतरित करे? सभी सहभागी स्वयं को उद्योग से जोड़ने के लिए आतुर रहते है अतः हमे यह जानना होगा की उद्योगों की क्या आशाए है I जिससे की शिक्षा जगत की ऍफ़ एन्ड डी इकाई फार्मा उद्योग की आर एन्ड डी इकाई से जुड सके I साथ ही यह प्रश्न भी उठाया गया की यह कार्यशाला नवीनतम नवाणु के अविष्कार में प्रभावी होगी I एवं चतुर्थ चरण में वैज्ञानिक सूत्र होगा जिसमे प्रतिभागियों ने बढ़ चढ़ कर नयी अविष्कार से सम्बंधित अपने शोधो को पोस्टर के माध्यम से व्यक्त किया I इस कार्यशाला में प्रतिभागियों को फैकल्टी फेलिसिटेशन अवार्ड से सम्मानित किया गया I एवं युवा अनुसन्धान पुरुस्कार फार्मास्युटिक्स, फार्मासूटिकल केमिस्ट्री, फार्माकोग्नॉसी एवं फार्माकोलॉजी के क्षेत्र में प्रथम एवं द्वितीय पुरुस्कार दिए जाएंगे I और कार्यशाला के अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र दिया जाएगाI कार्यशाला के अंत में डॉ नीलेश मालवीय द्वारा आभार प्रकट किया गया जिसमे उन्होंने आए हुऐ सभी प्रतिभागियों को धन्यवाद् देते हुऐ यह आश्वासन दिया की आगे भी SCOPE इसी तरह अकेडीमिआ इंडस्ट्री सहयोग के निरंतर अवसर प्रदान करता रहेगा जिससे उभरते हुऐ अविष्कारों को एक नयी दिशा मिलेगी और फार्मा उद्योग का नित नविन विकास होता रहेगा I इसी के साथ एक दिवसीय स्टेकहोल्डर कार्यशाला का उचित उद्देश्यों के साथ सफलता पूर्वक समापन हुआ I कॉलेज के प्रबंधन श्री राहुल
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