Monday, September 30, 2019

गांधी मेरी नज़र में


*महात्मा गाँधी को अपना आदर्श बनाएं*
150 वी गाँधी जयन्ती के उपलक्ष्य में हमारे पूज्य महात्मा गांधी जी को शत-शत नमन।हमारे राष्ट्र पिता गाँधी जी ने अपने सम्पूर्ण जीवन को देश और समाज के लिये समर्पित किया।यह तो हम सभी जानते है।सर्वप्रथम आज के परिपेक्ष्य में सर्वाधिक जरूरत है, गाँधी के मूल सिद्धान्तों में से एक सिद्धान्त सत्य की हमारे समाज मे हमें यह बात देखने को मिलती हैं। कि हम हर वर्ष अपने महापुरुषों की जयन्तियों का आयोजन कर बड़ी-बडी बाते करते हैं।साथ में उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प भी लेते हैं।स्कूल कॉलेज में चौराहे पर उनकी प्रतिमा पर हार फूल चढ़कर किसी नेता से चार शब्द सुनकर कार्यक्रम समाप्त कर अपने घर चले जाते है।लेकिन क्या बस इतना ही काफी है।गांघी जी के विचार आज की पीढ़ी के लिए उतने ही प्रासंगिक और अनुकरणीय है।जितने की पहले थे।उन्होंने हमें सत्य,अहिंसा ,स्वालम्बन आदि की शिक्षा दी। आज के वर्तमान युवा पाश्चात्य विचारों की ओर तेजी से अग्रसर होते जा रहे हैं। आज के युवाओं को उनके किसी भी काम में हस्तक्षेप पसंद नहीं है। ऐसी परिस्थिति में गांधी जी के विचारों की आज के युवा पीढ़ी को सर्वाधिक आवश्यकता है। सत्य और अहिंसा ही गांधीजी के दो अस्त्र हैं। जिन्हें शिक्षा में सबसे बड़ी नैतिकता माना गया है।आज के परिपेक्ष्य में देखे तो गांधी जी के फ़ोटो को हम हर कॉलेज या प्राध्यापकों के कक्ष में या सरकारी कार्यालय में लगे हुए देखे जाते हैं। लेकिन इन सब से जागृति नहीं आएगी। हमें हमारे महापुरुषों के चित्रों को नहीं बल्कि उनके चरित्र और सिद्धांतों को स्कूलो की हर क्लास में ब्लैक बोर्ड के दोनों और लिखना लिख कर रखना होगा। इसे हर कॉलेज स्कूलों में अनिवार्य करना होगा। ताकि 40 विद्यार्थियों की क्लास में यदि 4 बच्चे भी उनके सिद्धांतों को उनके चरित्र को अपनाते हैं। तो हम ए��          "ॐ"
*महात्मा गाँधी को अपना आदर्श बनाएं*
150 वी गाँधी जयन्ती के उपलक्ष्य में हमारे पूज्य महात्मा गांधी जी को शत-शत नमन।हमारे राष्ट्र पिता गाँधी जी ने अपने सम्पूर्ण जीवन को देश और समाज के लिये समर्पित किया।यह तो हम सभी जानते है।सर्वप्रथम आज के परिपेक्ष्य में सर्वाधिक जरूरत है, गाँधी के मूल सिद्धान्तों में से एक सिद्धान्त सत्य की हमारे समाज मे हमें यह बात देखने को मिलती हैं। कि हम हर वर्ष अपने महापुरुषों की जयन्तियों का आयोजन कर बड़ी-बडी बाते करते हैं।साथ में उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प भी लेते हैं।स्कूल कॉलेज में चौराहे पर उनकी प्रतिमा पर हार फूल चढ़कर किसी नेता से चार शब्द सुनकर कार्यक्रम समाप्त कर अपने घर चले जाते है।लेकिन क्या बस इतना ही काफी है।गांघी जी के विचार आज की पीढ़ी के लिए उतने ही प्रासंगिक और अनुकरणीय है।जितने की पहले थे।उन्होंने हमें सत्य,अहिंसा ,स्वालम्बन आदि की शिक्षा दी। आज के वर्तमान युवा पाश्चात्य विचारों की ओर तेजी से अग्रसर होते जा रहे हैं। आज के युवाओं को उनके किसी भी काम में हस्तक्षेप पसंद नहीं है। ऐसी परिस्थिति में गांधी जी के विचारों की आज के युवा पीढ़ी को सर्वाधिक आवश्यकता है। सत्य और अहिंसा ही गांधीजी के दो अस्त्र हैं। जिन्हें शिक्षा में सबसे बड़ी नैतिकता माना गया है।आज के परिपेक्ष्य में देखे तो गांधी जी के फ़ोटो को हम हर कॉलेज या प्राध्यापकों के कक्ष में या सरकारी कार्यालय में लगे हुए देखे जाते हैं। लेकिन इन सब से जागृति नहीं आएगी। हमें हमारे महापुरुषों के चित्रों को नहीं बल्कि उनके चरित्र और सिद्धांतों को स्कूलो की हर क्लास में ब्लैक बोर्ड के दोनों और लिखना लिख कर रखना होगा। इसे हर कॉलेज स्कूलों में अनिवार्य करना होगा। ताकि 40 विद्यार्थियों की क्लास में यदि 4 बच्चे भी उनके सिद्धांतों को उनके चरित्र को अपनाते हैं। तो हम एक नव भारत का निर्माण अति आसानी से कर सकते हैं। आज के परिपेक्ष्य में युवाओं को गांधी जी के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतार कर सामाजिक परिवर्तन एवं राष्ट्र निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान देना चाहिए। गांधी जी के ग्रंथों को पढ़कर अपने जीवन को सार्थक बनाएं। आज के माता- पिता अपने बच्चों को थोड़ा तो गांधीवादी जरुर बनाएं।
और एक सबल राष्ट्र बनाने में अपना योगदान अवश्य दे।

       वंदना पुणतांबेकर
               इंदौर

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