🌸🌸मेरा प्राथमिक शाला का प्रथम 🌸🌸
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दिवस कितनी ..कितनी ssssssपुरानी🏠
बात हो गई । पर मेरे लिये स्कूल का वो पहला दिन आज नया है।याद भी है ।
मेरे पिताजी नगर के समृद्ध व्यक्तियों में बडे कारोबारी थे
व उन्हें व्यापार धंधे से कम समय मिलता था । हम छह भाई बहन थे पर परवरिश में उन्होंने कोई कसर नहीँ छोड़ी थी , क्योंकि हमारी माँ का अल्पायु में ही स्वर्गवास हो गया था इसलिये उन पर दोहरी जबाब दारी थी।
जब मैं पाँच वर्ष की हुयी उन्होंने नगर की सरकारी कन्या शाला में
जो उस समय श्रेष्ठ तम थी ।उसमें
दाख़िला करवाने के लिये
घर के बुजुर्ग गृह सेवक व ड्राइवर
के साथ मुझे स्कूल नाम लिखाने भेजा।
स्कूल में प्रधानाचार्य जी ने रजिस्टर में दर्ज किया ..जन्म तारीख़ —तो हमारे अल्ला रखा मुस्लिम ड्राईवर ने बताया
१- जुलाई ..
क्योंकि उस दिन १- जुलाई थी
पिता का नाम—
नामसुनकर उन्होंने पूछा - बच्ची का नाम-
अल्लारखा ने बताया
“कुलसूम “जैन
चूंकी मैडम परिचित थीं वो चौंकी
उन्होंने मुझसे पूछा - बेटा नाम बताओ — मैने कहा ..बडी मुन्नी
क्योंकि पहले स्कूल में एडमिशन तक मुख्य नाम रखा ही नही जाता
था।
उनको समझ आ गई वम्रे पहले ही मेरे परिवार केबडे पिताजी की लडकी का नाम लिखाया गया था
कुसुम पाटनी
तो मेरा नाम भी उन्होंने लिखा
कुसुम पाटनी
जो मुझे आज तक पसंद नहीं आया। पर क़िस्सा बहुत पसंद है
कुसुम सोगानी का शालेय प्रथम दिवस
व नामकरण अंत दिवस तक रहेगा😊😊
संस्मरण —..कुसुम सोगानी
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![]() |
| कुसुम सोगानी |
बात हो गई । पर मेरे लिये स्कूल का वो पहला दिन आज नया है।याद भी है ।
मेरे पिताजी नगर के समृद्ध व्यक्तियों में बडे कारोबारी थे
व उन्हें व्यापार धंधे से कम समय मिलता था । हम छह भाई बहन थे पर परवरिश में उन्होंने कोई कसर नहीँ छोड़ी थी , क्योंकि हमारी माँ का अल्पायु में ही स्वर्गवास हो गया था इसलिये उन पर दोहरी जबाब दारी थी।
जब मैं पाँच वर्ष की हुयी उन्होंने नगर की सरकारी कन्या शाला में
जो उस समय श्रेष्ठ तम थी ।उसमें
दाख़िला करवाने के लिये
घर के बुजुर्ग गृह सेवक व ड्राइवर
के साथ मुझे स्कूल नाम लिखाने भेजा।
स्कूल में प्रधानाचार्य जी ने रजिस्टर में दर्ज किया ..जन्म तारीख़ —तो हमारे अल्ला रखा मुस्लिम ड्राईवर ने बताया
१- जुलाई ..
क्योंकि उस दिन १- जुलाई थी
पिता का नाम—
नामसुनकर उन्होंने पूछा - बच्ची का नाम-
अल्लारखा ने बताया
“कुलसूम “जैन
चूंकी मैडम परिचित थीं वो चौंकी
उन्होंने मुझसे पूछा - बेटा नाम बताओ — मैने कहा ..बडी मुन्नी
क्योंकि पहले स्कूल में एडमिशन तक मुख्य नाम रखा ही नही जाता
था।
उनको समझ आ गई वम्रे पहले ही मेरे परिवार केबडे पिताजी की लडकी का नाम लिखाया गया था
कुसुम पाटनी
तो मेरा नाम भी उन्होंने लिखा
कुसुम पाटनी
जो मुझे आज तक पसंद नहीं आया। पर क़िस्सा बहुत पसंद है
कुसुम सोगानी का शालेय प्रथम दिवस
व नामकरण अंत दिवस तक रहेगा😊😊
संस्मरण —..कुसुम सोगानी

Mostest active lady of our whole camp
ReplyDeleteManoj patni
DeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteBeautiful sweet memories my dear sister Kusum jiji.
ReplyDeleteAnd I like your name a lot.
☺️ 🙏
Beautiful sweet memories my dear sister Kusum jiji.
ReplyDeleteAnd I like your name a lot.
☺️
ओह! हमें तो आज तक भी ये बात पता नहीं थी,बहत ही मजेदार किस्सा
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