Wednesday, June 26, 2019

पाठशाला का प्रथम दिन


प्रभा जैन
माँ, पिताजी के साथ पहले दिन गुजराती स्कूल में प्रवेश दिलाने ले गए।चूंकि मध्य प्रदेश ग्वालियर से पिताजी का ट्रांसफर गुजरात वल्लभ विद्या नगर होने के कारण मुझे गुजराती मीडियम में भर्ती कराया गया।वँहा पर हिंदी या अंग्रेजी मीडियम की कोई स्कूल नही थी।कॉलोनी के सारे फ्रेंड्स के बच्चे वहीं पढ़ रहे थे।पहले दिन ही क्लास में बहिनजी ने गुजराती में नाम पूछा।कुछ भी पल्ले नही पड़ रहा था क्या पूछ रही हैं।बस खड़े होकर आंखों में पानी लिए ,नीचे ज़मीन कुरेदते हुए खड़ी रही।और एक दो बार पुनः वही पूछा ।मुझे समझ ही नही आरहा था क्या पूछा जा रहा है।जब थोड़ी देर बाद मेरे पड़ोस में रहने वाली सखी यामिनी ने जवाब दिया,तब समझ आया कि मेरा नाम पूछा जारहा था।घर आकर माँ से शिकायत की मुझे  स्कूल नही जाना है।,,और करीब एक सप्ताह तक स्कूल नही जाने की ज़िद रही।फिर अगले सप्ताह टिचरजी ने पुनः कुछ पूछा,जिसमे स्वाद के बारे में पूछा कि सफेद वस्तु क्या है,और इसका स्वाद क्या है?
मुझसे पूछा गया,पुनः
[26/06, 1:15 AM] Prbha Jain: पुनः मैने कांपती आवाज़ में जवाब दिया।मिठु।सभीको हंसी आरही थी।मिठु यानीकि नमक का स्वाद  मीठा होता है सुनकर।,,,फिर स्कूल जाने का मन नही होता था।किंतु धीरे 2 समय के अनुसार गुजराती सिख ली ,और आज मध्यप्रदेश में रहकर जब भी किसी साहित्य का भाषान्तर करना होता है तब मुझे ही याद किया जाता है।,,खैर मेहनत और लगन से सब कुछ किया जा सकता है।ये पाठ पढ़ने को मिला।आज भी गुजराती स्कूल के दिन और ऐसे किस्से याद आ जाते है।
प्रभा जैन।

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