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| अचला गुप्ता |
हमारा बचपन मे बारिश में भीगना ,कागज की नाव बना कर बहते पानी मे तैरना ,संगी साथियों को बारिश के पानी की तरफ धकेलना ये सब मानो अब कल्पनातीत हो गया है।हमारी वर्तमान और अगली पीढ़ी इन खूबसूरत अनुभवों से वंचित सी होती जा रही है।
अब समय आ गया है कि हम प्रकृति के संरक्षण का जिम्मा उठाएं।इसके लिए हमे ही पहल करनी होगी ,युवाओं और बच्चों के मन मे प्रकृति प्रेम का अलख जगाना होगा।वृक्षारोपण के लिए उन्हें प्रेरित करना होगा ।
लुप्त होते पक्षियों की रक्षा के लिए भी यह बेहद आवश्यक है।
यदि हम थोड़ा सा भी प्रयास इस दिशा में करें तो वो दिन दूर नही जब हमारी अगली पीढियां भी ये गीत गुनगुनाएँगी ,हरी भरी वसुंधरा ,नीला नीला ये गगन....
अचला गुप्ता
इंदौर

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