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| अचला गुप्ता |
लेकिन प्रथम स्थान के बावजूद मुझे नागपूर के अच्छे स्कूलों में एडमिशन नही मिल रहा था।सभी पुनः तीसरी कक्षा में ही एडमिशन की बात कह रहे थे ,जिससे पापा बहुत परेशान हो गए।घर के पास ही एक सरकारी स्कूल था।पापा ने जब वहां बात की तो वे चौथी कक्षा में एडमिशन देने को तैयार थे।फिर निर्णय लेते हुए पापा ने मुझे वहीं दाखिल किया और इस तरह अपना साल बचाया मैंने।पांचवीं कक्षा में मुझे नागपुर के एक प्रतिष्ठित स्कूल में एडमिशन मिला जहां से मैंने दसवीं तक की पढ़ाई पूरी की।लेकिन नागपुर का वह पहला स्कूल मैं कभी नही भूल पाऊँगी ,जहां से मैंने मराठी भाषा को सीखना शुरू किया था।
अचला गुप्ता
इंदौर

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