Wednesday, September 9, 2020


शिक्षक के बिना ज्ञान नहीं 
गूगल - सा अब विद्वान नहीं ।
अ  से अध्यापक है  होता 
सृजनाकार - सा स्वर - व्यंजन   सिखाता 
ध्या  से ध्यान -  साधना करवाता 
धर्म - नैतिकता का पाठ पढ़ाता।  
प से पूर्णता का प्रतीक बन के  
सही दिशा ज्ञान है सिखाता 
क से  कर्ता , कर्म , क्रिया , कारक बनके 
व्याकरण ज्ञान सिखलाता। 
शब्द , व्याकरण के मेल से बनता  वाक्य 
सिखा के  बौद्धिक ज्ञान संसार 
करे  भविष्य को साकार 
अध्यापक की महिमा अपरम्पार 
करती  " मंजु " कोटी  - कोटी नमस्कार।  
*मंजू गुप्ता 
वाशी 
   

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