शिक्षक के बिना ज्ञान नहीं
गूगल - सा अब विद्वान नहीं ।
अ से अध्यापक है होता
सृजनाकार - सा स्वर - व्यंजन सिखाता
ध्या से ध्यान - साधना करवाता
धर्म - नैतिकता का पाठ पढ़ाता।
प से पूर्णता का प्रतीक बन के
सही दिशा ज्ञान है सिखाता
क से कर्ता , कर्म , क्रिया , कारक बनके
व्याकरण ज्ञान सिखलाता।
शब्द , व्याकरण के मेल से बनता वाक्य
सिखा के बौद्धिक ज्ञान संसार
करे भविष्य को साकार
अध्यापक की महिमा अपरम्पार
करती " मंजु " कोटी - कोटी नमस्कार।
*मंजू गुप्ता
वाशी
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