शिक्षक दिवस गुरू को नमन
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वेदों के रचयिता,वेदव्यास गुरू जी को नमन
शिक्षक दिवस पर ,गुरुओँ का वँदन अभिनंदन।
गुरुओँ का शिक्षक दिवस,करें गुरू को प्रणाम
विवेकानंद सा बनूं,करूं गुरू का चरणस्पर्श।
गुरू चरण शीश नवाऊं,गुरू देवें ज्ञान प्रकाश
गुरू कृपा तारण करे,अंधकार का होवे नाश।
गुरू दीपक समान,फैल रहा उजास उजियारा
गुरू बिन कुछ नहीँ,जैसे दीपक तले अँधियारा।
गुरू कष्ट निवारक हैं,गुरू हर लेँ भक्तों की पीर
गुरू की एक एक बूंद,जैसे सागर भर रहा नीर ।
मैं अज्ञानी मूर्ख भक्त,गुरू आप हैं अंतरयामी
ज्ञान की ज्योत जलाओ,अपने रंग मेँ रंगो स्वामी।
शिक्षक दिवस हो सार्थक,आदर्श चरित्र बना दो
अपनी ज्ञानगंगा बहा दो,निज चरणों में बिठा लो।
भ्रष्टाचार को मिटाएँ,अनुशासन जीवन मेँ घोल दो
राधा कृष्णन सम बना दो, प्रेम ज्योत जगमगा दो।
इँदौर मध्यप्रदेश
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रिश्ते
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*कुछ रिश्ते ऐसे ही होते हैं*
*हृदय में चस्पा हो जाते हैं सदा के लिए* ।
*हमारा रिश्ता भी तो कुछ ऐसा ही है*,
*दशकों बीत जाने पर भी*
*मेरी हरी साड़ी -सा हरा है*।
*हैरान हैं न आप भी यह जानकर*
*क्या करुँ - यह उपमा थोड़ी* *विचित्र अवश्य है*,
*किन्तु सत्य से जुड़ी है* ।
*आपके प्रथम दर्शन की छवि जो हृदय में जड़ी है* ।
*ज्ञान की गहराइयों में उतरने की कला*
*आपने ही सिखाई है* ,
*गुरु शिष्य संबंधों के विस्तार की व्याख्या*
*आपने - ही समझाई है*,
*अभी भी गूंजता है कानों में*
*प्रथम बार आपके द्वारा पुकारा मेरा नाम*,
*उसी क्षण तो हुई थी*
*अपने अस्तित्व से मेरी पहचान* ।
*कितनी सहजता से गुरु शिष्य के भीतर उतरता है*,
*कितनी सहजता से बिना जताए*
*उसका तम हरता है* ,
*कितनी सहजता से ज्ञान की लौ लगाता है*,
*कितनी सहजता से राह के काँटे हटाता है*,
*कितनी सहजता से एक साथ अनेक में समा जाता है*
*और आजीवन दीपक की पावन लौ सा जगमगाता है* ।
*ईश्वर के समतुल्य यही तो इक नाता है ,मेरे माता -पिता ,गुरु*
*सब आपसे ही तो सीखा है*,
*तभी तो आपकी छवि मेरे हृदय में चस्पा है सदा के लिए* ।
*नमन उन्हें जिन्होंने कठिनतम् सवालों को यूँ ही पीठ थपथपा कर समझा दिया हो*।
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गुरुदेव सादर नमन
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गुरुदेव जो इस जन्म मिले, जन्मोजन्म मिले ये अभिलाषा
सच्चे देव शास्त्र गुरु की,जिन्होंने बतलाई परिभाषा।
गुरुदेव मिले एक मुझे जो,घर की प्रथम पाठशाला रूप
दादा,दादी,नाना,नानी,माँ, बाबूजी समस्त परिवार कुटुम्ब।
जिनके भिन्न भिन्न रूप गुरु बन,सीखा दिए गुर अनेक
घर परिवार,संस्कारों की बेल महक रही इनसे चहुँ और
वैभव फूल खिले हैं,इस बगिया के जीवन में चहुँ ओर।
बहुत पुण्य से ज्ञान कला खिली,सर्वत्र दुनिया महकाने में,जिनकी ज्ञान दृष्टि मिली,
ऐसे ज्ञानधारी शिक्षा गुरुओं की सीख, हमें पग पग पर मिली।
मित्रता के पवित्र झरने जीवन में बहते रहे
सच्चे राग और द्वेष दिखाकर,भला बुरा जीवन में क्या? कटु मीठे अनुभव से पाठ पढ़ा गए।
सबसे सच्चा,सोलह आने सच्चा गुरु स्वयं का कौन?
मन की बात स्वयं दिल से सुन जो दिल कहे
भला काज यही सब के हित में,पत्थर दिल नहीं,मोम तू बन।
सच्चा गुरु वही,जो सुख दुःख में सम रहने की बात कहे
नहीं कोई रहे आशा और विषम परिस्तिथि में विचलित न होने का गुर बताये।
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बचपन
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बात उस समय की है जब मेरा बेटा प्रशांत कक्षा दो का विद्यार्थी था। शैतानी में अव्वल। महावीर बाल मंदिर में पढ़ता था।उस समय स्कूल मनोरमा गंज में था। और हमलोग तिलक नगर में रहते थे। प्रतिदिन की भांति मैं उसे बस स्टाप पर छोड़ने आई तो बच्चों ने बताया आंटी प्रशांत से टीचर ने पिछले दिनों हुए अर्द्धवार्षिक परीक्षा के सारे विषयों की परीक्षा फिर से ली है, क्योंकि वह स्कूल में उपस्थित तो था लेकिन उसके द्वारा हल किए हुए प्रश्नपत्र नहीं मिलें।
पूछने पर पता चला बेटे जी उत्तरित प्रश्नपत्र हवाई जहाज बना कर उड़ा दिए थे।आज भी याद कर कर के खूब हंसते हैं।
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शिक्षक दिवस
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छात्र शिक्षक बिन अधूरे
शिक्षक भी उन्हें करते याद
भेजे संदेश एकदूजे को
याद बहुत तुम आते हो
है सभी स्तब्ध देखो
कैसा समय यह आया है
बच्चों की कलरव कहाँ
कहाँ बातों का वह शोर
पढ़ने को बेताब है बैठे
कब गुजरेगा अब यह दौर
है सभी बैचेन देखो
कैसा समय यह आया है।
कैसा पसरा है सन्नाटा
कब आएगी फिर वह भौर
उम्मीद लगाए बैठे है सब
बस बीते जल्दी अब यह दौर
परिस्तिथियों का रूप देखो
कैसा समय यह आया है।
है शिक्षक भी आज गुमसुम
चिताओं से है बेहाल
डगमगा कर भटक न जाएं
हमारे सभी नोनिहाल
समय की करवट कैसी देखो
कैसा समय यह आया है।
पढ़ना लिखना भूल न जाना
बात यही सीखानी है
दूर हो तो दूर से ही सही
जिम्मेदारी हमें निभानी है
एकलव्य बनने जैसा ही देखो
कैसा समय यह आया है।
शिक्षा की महत्ता को तुम
भूल न जाना इस संकट में
समय यह भी बीत जाएगा
राह में आए कुछ कंटक है
है परीक्षा की घड़ी यह देखो
कैसा समय यह आया है।
देखकर शिक्षक को जीवन मे
वे सपने कई संजोते है
अपने से ऊँचा बनाने को
सदा प्रयास शिक्षक करते है
यह अनोखी सोच है देखो
कैसा समय यह आया है।
अंतर्जाल के माध्यम से
जुड़े है अब गुरु -शिष्य
ज्ञान का प्रकाश फैलाने में
लगे हुए है सभी विज्ञ
समय की पदचाप देखो
कैसा समय यह आया है।
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मेरे जीवन का शिक्षक
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मैं जो कुछ भी हूँ आज,
श्रेय देती हूँ, उन शिक्षको को।
जिन्होंने हमे पढ़ाया लिखाया ,
औऱ यहाँ तक पहुँचाया।
मैं भूल नहीं सकती जीवन भर,
उनके योगदानो को ।
इसीलिए सदा मैं उनकी,
चरण वंदना करती हूँ।
शिक्षक ही सब बच्चों के
हाथों की लकीरें बनाते है।
कोरे कागज पर सतरंगी ,
तस्वीरे बनाते हैं।
सबके लिए श्रद्धा औऱ ,
विश्वास तुम ही हो।
ज्ञान ,विज्ञान की सुमधुर सी,
सुवास तुम ही हो।
इसीलिए सदा मैं उनकी ,
चरण वंदना करती हूं।
समझते हैं, जब सूझता नहीं,
कुछ भी राहों में तो शिक्षक राह दिखाते हैं।
जीवन के अंधेरे में रोशनी का ,
दीपक जलाते औऱ रास्ता दिखाते हैं।
सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं,
असल जीवन मे जीना भी शिक्षक ही सिखाते हैं।
इसीलिए सदा मैं उनकी ,
चरण वंदना करती हूँ।
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गुरु
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सृष्टि की अतुल्य सौगात होता है गुरु।
संयम धैर्य त्याग की दौलत लुटाता है गुरु
मात पिताश्री चरणों से ऊपर होता है गुरु
ज्ञान गंगाकी निर्मल रसधार होता है गुरु।
पत्थर तराश कर अनमोल हीरा बनाता गुरु।
शब्दों की बाती ज्ञान का चिराग होता है गुरु
हकीकत की धारा में पावनआस है गुरु।
जीवन घनी धूप में ठंडी छांव होता है गुरु।
गुरु महिमा असंभव अखंडअपार होता है गुरु।
रहे कृपा मुझ पर यही आपसे प्रार्थना है गुरु।
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गुरुदेव
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जो ना होते आप गुरुवर
तो हम अनपढ़ रह जाते
भीड़ भरी इस दुनिया में
न जाने कहां खो जाते ।।
हाथ पकड़कर लिखना सिखाया
क ख ग घ पढ़ना सिखाया
अंतस का अंधकार हटाकर
ज्ञान प्रकाश दिखा जाते ।।
वर्षों से हम भटक रहे थे
जीवन राह खोज रहे थे
दिया उजाला सत्यज्ञान का
हम तो सोते से जागे ।।
यह काया माटी का ढेला
जीवन का रस इसमें घोला
ज्ञान का मार्ग दिखा गुरुजी
चेतन संचार करा जाते।।
ईश हमारे भाग्य विधाता
गुरुवर मेरे ज्ञान के दाता
रब से मिलने का रास्ता
गुरुवर ही तो दिखलाते।।
जो ना मिलते "राज" गुरुवर
तो हम प्यासे रह जाते।।
शिक्षक
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मेरा जीवन
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अंधकार था मेरा जीवन ,
मैं मूर्ख अज्ञान था ,
चैतन्य प्राणी होने पर भी,
मैं सबसे अंजान था ,
जिसने दिशा का ज्ञान कराया,
मानो उसका एहसान ,
इसीलिए तो सब करते हैं ,
शिक्षक का सम्मान।
हम गीली मिट्टी के पुतले ,
हर पल उन्होंने हमें संभाला ,
हाथों से आकृति बनाई ,
फिर सांचों में हमको डाला
अपना सर्वस्व समर्पित ,
तभी बने महान ,
इसीलिए तो सब करते हैं ,
शिक्षक का सम्मान ।
खुशबू के बिना फूल अधूरा,
हरियाली के बिना चमन ,
जल के बिना अधूरी मछली ,
गुरु के बिना अधूरा जीवन
कलपतरु के जैसे हैं वे ,
असंख्य गुणों की खान ,
इसीलिए तो सब करते हैं ,
शिक्षक का सम्मान ।
शिक्षक साहिल है नैयाके ,
वही राष्ट्र निर्माता हैं ,
इस देश के कर्णधार ,
भारत के भाग्य विधाता हैं,
उनके चरणों में नतमस्तक ,
कोटि-कोटि प्रणाम ,
इसीलिए तो सब करते हैं,
शिक्षक का सम्मान ।
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शिक्षा
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शिक्षा वही जो राष्ट्रपर
गौरव करना सिखलाए
संस्कार संस्कृतिसाहित्य का मान करना सिखाए
शिक्षा व्यवसाय नहीं
एक रचनात्मक सुंदर
संसार होता है
शिक्षक एक सफल शिल्पकार नया
संसार गढ़ने वाला होता है
शिक्षा समाज को मानव को राष्ट्र को देता है कल्याणकारी दृष्टिकोण
महत्वकांक्षाओं इच्छाओं सपनों को
सफल कर जीवन को देता नया मोड़
संस्कृति जीवन मूल्यों परंपराओं
का रक्षक होता है शिक्षक
निर्माण पुनर्निर्माण उत्थान की
नींव रखताहै शिक्षक
पथप्रदर्शक बन जोश होश
नई चेतना भरता है शिक्षक
भूत भविष्य वर्तमान से जुड़ा एक
प्रकाश स्तंभ है शिक्षक
आत्मा को सपनों को सोए अरमानों
को जगाता है शिक्षक
अज्ञान से ज्ञान की ओर मेहनत
से ले जाता है शिक्षक
नई तकनीकी अपनाता डिजिटल इंडिया का प्रतिनिधि है शिक्षक
अब आधुनिक राष्ट्र नएसमाज का निर्माता प्रेरक है शिक्षक
दार्शनिक मार्गदर्शक अद्भुत मित्र
होता है शिक्षक
अनुपम सेवा भाव युक्त सहनशील
सकारात्मक होता है शिक्षक
नमन उन शिक्षकों को जो नवीन नई पीढ़ी को सही मार्ग दिखाते हैं
माता-पिता की दी शिक्षा पर नया इतिहास रचाते हैं
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गुरु वन्दन
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जीवन में सर्व प्रथम,माँ गुरु बन आई ।
हँसना खेलना चलना सिखा माँ गुरु वन्दन,चंदन,अभिनंदन,
दादी ने कहानियॉं से राह बताई दादी गुरु माँ को वन्दन ।
बुआ ने लोरी से संगीत सिखाया बुआ गुरु माँ को वन्दन ।
चाचीने स्कुल का मतलब सिखाया चाची गुरु माँ को वन्दन ।
दीदी ने सहेली के प्यार को बताया दीदी गुरु माँ को वन्दन ।
नानी ने दुलार दिया आदर देना सिखाया नानी गुरु माँ को वन्दन।
मौसी ने देखभाल की लालन-पालन सिखाया मौसी गुरु माँ को वन्दन ।
मामी ने पकवान की थाली सजाना सिखाया मामी गुरु माँ को वन्दन।
सखी ने मस्ती ही मस्ती जीवन सिखा
सखी गुरु माँ को वन्दन
भाभी से घर सजाना सीखा भाभी गुरु माँ को वन्दन।
सासु माँ ने रिश्तों की माला बन जीना सिखाया सासु गुरु माँ को वन्दन।
जेठानी ने सम्बन्धों का अर्थ सिखाया
जेठानी गुरु माँ को वन्दन
ननद ने हसी ठिठोली सिखाया
ननद गुरु माँ को वन्दन
बेटी ने जीवन में तकनिकी सिखाई
बेटी गुरु माँ को वन्दन।
आधुनिक तकनीक ने जीवनपथ सिखाया तकनीक गुरु माँ को वन्दन
"रश्मि" ने हर पल अनुभावों से सिखा सभी अनुभव गुरु माँ को वन्दन।
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संस्कार
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सबसे पहले हमारे शिक्षक माता पिता होते है वो हमें ज्ञान व संस्कार देते है।
उन्होंने ही हमें स्कूल में जो शिक्षक होते है उनका महत्व बताया कि तुम्हारे वो गुरु है
जो शिक्षा,व बुद्धि के विकास में सहायक होते है।
उन्हीं के सानिध्य में हम सीढी दर सीढी चढते हुए आगे बढ़ते है।
उन्हीं के मार्गदर्शन से हमारी शिक्षा, बुद्धि का विकास होता है।
शिक्षक ही वो गुरु है हमारा
जिसकी छाया में मिलता ज्ञान,ध्यान अनुशासन।
गुरु अपने शिष्य की हर बात समझता है
गुण अवगुण की पहचान से अवगत कराता है।
आज मैं शिक्षक दिवस पर मेरे
स्कूल की शिक्षिका जो मेरी गुरु रही जिन्होंने मेरी बुनियादी शिक्षा को मजबूत किया।
उनको बारम्बार नमन करती हूं
उन्हीं के कारण मेंने अनमोल शिक्षा आगे पाई है।
उन्होंने मुझे ज्ञान का भंडार दिया
और भविष्य के लिए तय्यार किया
शिक्षा, सुसंस्कृत ओर समर्पण की
बाते सिखाई।
ज्ञान आपसे जो मिला वही सच्चा वैभव है।
नमन करती हूं उन सभी तत्कालीन गुरुओ को
जिन्होंने मुझे शिक्षा में मार्गदर्शन दिया। 🙏🙏🙏🙏
मुझ ना समझ को समझदार बना दिया
इस ग्रुप मैं आपने मुझे लिखने
बोलने का हुनर दे दिया।
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नहीं कर सकते हम शब्दों से वर्णन
हे! अतालिक तुम्हें करते हैं नमन।
तुम्हारी जादुई तोहफों को क्या नाम दूं?
अविरल ज्ञान की धारा को क्या मान दूं?
ईश तुम, देते हो जिंदगी के नए आयाम
अद्भुत विवेक भर देते हो देकर नया पयाम।
शिखर तक पहुंचाने में देश के कर्णधार को
रहते हो अग्रसर अटल हो या कलाम को।
महापुरुष हुए हैं जगत में प्रत्यक्ष में
ज्ञान चक्षु खोलते हो तुम परोक्ष में।
किसी कवि के कल्पना से परे हो तुम
अलौकिक उपहार हो, प्रकाश पुंज हो तुम।
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गुरु शिष्य संबंध
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कविता
अच्छा गुरु जो मिल जाए !
क़िस्मत शिष्य की खुल जाए !!
गुरु के जैसे कोई महान नहीं !
गुरु ही जीवन में आनंद लाए !!
गुरु ही शिष्य को विघा का दान देता है !
जीवन में ज्ञान का प्रकाश भरता है !!
गुरु ने सिखाया संघर्षो का चक्रव्युह भेदना !
गुरु मिलना एक अमुल्य तोहफ़ा है !!
सही ग़लत का ज्ञान गुरु ही बतलाता है !
ना ना प्रकार की कलाएँ गुरु ही सिखाता है !!
गुरु बिना ज़िंदगी बेरंग, बेमतलब है !
गुरु हमें हमारी हर मुश्किलों से निकालता है !!
संस्कार और संस्कृति सिखा कर जीवन सफल बनाया !
मन का तम दूर कर जीवन को उज्ज्वल बनाया !!
गुरु का आशिष सदा मिले हो जाए भवपार !
गुरु ने मन के हर डर से लड़ना सिखाया !!
गुरु को बारम्बार प्रणाम है !
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विधा - विधाता छंद
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करो गुणगान शिक्षक का वही शुभ राह दिखलाते ।
हरे अज्ञानता मन की उजाला दिव्य कर जाते ।
असुर सुर पूजते गुरु को चरण रज शीश में धरते ।
रखे नित नेह छाया में सुकर्मन रीति समझाते ।।1।।
करे गुरु नेह माता सम पिता सम प्यार बरसाते ।
परुष बाहर कभी बनते मगर मन नित्य सहलाते ।
गढ़े घट प्रेम से गुरुवर हरे सब शिष्य का अवगुण ।
मिटा दुख की निशा काली सुहानी भोर ले आते ।।2।।
पढ़ाते पाठ नैतिकता नवाचारी वही होते ।
करे प्रक्षालना मन की कलुष दुर्भाव सब धोते ।
परिष्कृत बुद्धि शुचि करते दिखाते राह उत्तम हैं ।
धरा मन की सदा सींचे हृदय गुरु ज्ञान नित बोते ।।3।।
भाटापारा
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जीवन
======
जीवन की सरल हो जाती है ।
ज्ञान हमे देता हैं एसा
उनकी शिक्षा से ही बनते ।
हम बडे आफिसर ।
जग में होता हैं। नाम हमारा
उनके बीना हैं जीवन बेकार
गुरू के बीना सब कुछ सुना ।
जीवन मे उनसे उजाला ।
भगवान। जैसे शिक्षक हमारे ।
माँ पिता सा। प्यार देते ।
पिता जैसी डाँट भी देते ।
अ आ इई सब कुछ हमे सीखा कर आगे बढाते ।
संस्कृत के संस्कार बताये ।
इस पुलकित। अवसर। पर ।
आपकी महिमा। बहुत महान ।
सभी करते आपको प्रणाम।
=======
दर्द
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दर्द फिर उभरा दवा फिर चूकी दोस्त
मोत मेरे द्वार खड़ी मेरा नाम पुकारा रही
अंजुमन से निकलने में देर कर दी हमने
साहस की कमी रही नादानियां भी रही
साहस से काम लेते मंजिल पर निंशा हौते
कहीं भी किसी डगर पर निकल पड़े होते
किसी ना किसी ठिकाने पर मेरा नाम भी गुदा होता
दर्द फिर उभरा दवा फिर चूकी दोस्त
मोत द्वार खड़ी मेरा नाम पुकारा रही
नादानी के रहते मयकदे जा बैठे यार
होश संभाला तब बहुत रोते बर्बदी पर
मयकदे से छुटे तीन पत्ती ने घेरा हमको
हंसती रही दीवारे जुएंघर की दीवारे
काश गुरु बेहतर मिल गया होता दोस्त
जिंदगी को मुकाम मिल गया होता यारो
दर्द फिर उभरा दवा फिर चूकी दोस्त
मोत मेरे द्वार खड़ी मेरा नाम पुकारा रही
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गुरु महिमा
======
गुरु ही ब्रह्मा गुरु ही विष्णु
गुरु ज्ञान का है भंडार
गुरु से ज्ञान का संचालन है
शक्ति गुरु की है अपार।।
परम ज्योति गुरुदेव हैं
खुलते हृदय के बंद किवाड
जागृत होती शक्ति हमारी
आ जाती बुद्धि की बाढ़
गुरु ज्ञान की नैया है
हो जाते भवसागर पार
गुरु से ज्ञान का संचालन है
शक्ति गुरु की है अपार।।
गुरु चरणारविंदो में
जिसने शीश झुकाया
दुनिया का सुख साधन
अपने जीवन में पाया
अज्ञान का अंधकार मिटाते
महिमा उनकी अपरंपार
गुरु से ज्ञान का संचालन है
शक्ति गुरु की है अपार।।
गुरु ही पूजा गुरु ही भक्ति
गुरु से ही चल रहा संसार
गुरु ही जड़ है गुरु ही चेतन
गुरु ज्ञान की गंगा है
गुरु से बहती है रसधार
गुरु ज्ञान का संचालन है
शक्ति गुरु की है अपार।।
*पदमा ओजेंद्र तिवारी दमोह मध्य प्रदेश
==============
: *नमो: नमो: शत-शत वंदन*
========
शत-शत वंदन प्रथम गुरु को
जिसने हम पर ध्यान दिया.
जीवन के हर कदम-कदम पर,
कैसे चलना ज्ञान दिया.
नमो: नमो: शत:शत वंदन....
जब-जब राह अंधेरी आई
नहीं सूझता था कुछ भी,
हाथ पकड़कर गुरुवर ने
हमको रोशन हर मार्ग दिया.
नमो: नमो: शत-शत वंदन
क्या करना है? क्या बनना है?
समझ नहीं था कुछ हमको,
ज्ञान दिया और योग्य बना कर,
सपनों का संसार दिया.
नमो नमो शत शत वंदन
नमन-नमन सारी सृष्टि को
मां पृथ्वी को नमन-नमन,
अपनी गोद बिठाकर हमको
पालन पोषण प्यार दिया.
नमो:नमो: शत-शत वंदन
*रचनाकार - श्रीमती प्रमिला सक्सेना,* *ब्यावरा, जिला राजगढ़, मध्य प्रदेश*
================
शान
======
शिक्षकों की शान में,
जन्मदिन किया नाम है,
डॉ राधाकृष्णन का ,
स्मरण होना चाहिए।
गुरु बिन ज्ञान नही,
गुरु बिन मान नही,
सभी गुरुजनों का,
सम्मान होना चाहिए।
रास्ता बताने वाले,
भविष्य बताने वाले,
ऐसे गुरुजनों का,
गुणगान होना चाहिए।
प्रथम गुरु है माँ,
पहला पाठ सिखाती माँ,
करुणामयी माँ का,
हमे ध्यान होना चाहिए।
बनाते शिक्षा को भार ,
जो करते हैं व्यापार,
ऐसे व्यवहार हमे,
अस्वीकार होने चाहिए।
भटकते है गाँव गाँव,
न देखे धूप या छाँव,
मेहनतकश गुरु पर,
हमे मान होना चाहिए।
नम्बरो की होड़ जहाँ,
नम्बरो की दौड़ वहाँ,
ऐसी शिक्षानीति में,
बदलाव होना चाहिए।
स्वावलंबन सिखाये जो,
जीवन मूल्य बताये जो,
ऐसी शिक्षा नीति पर,
विचार होना चाहिए।
स्वरचित
=========
विधा:-कविता
शीर्षक :शिक्षक
===
आओ करें सम्मान,
राष्ट्र निर्माता रूप भगवान।
लें आशीष उनका
बढाते रहे कदम
जन्मदात्री है प्रथम
वंदनीय अधिष्ठात्री हमारी
आओ करें सम्मान,
राष्ट्र निर्माता रूप भगवान।
चढकर ऊँचे भी शिखर
सेवा भाव में रहे
सदा हम तत्पर
कभी न भूलें हम
विद्या के मंदिर के
अनमोल वाणी शिक्षक के
आओ करें सम्मान,
राष्ट्र निर्माता रूप भगवान।
पूज्यनीय हैं हमारे ,
सभी हीरे समान शिक्षकगण।
जो बहाते हैं
शुद्ध पवन राष्ट्र चमन
हर अंधियारा
जलाते हैं रहते
दीपक शिक्षा का
हम सबके अंतर्मन
आओ करें सम्मान,
राष्ट्र निर्माता रूप भगवान।
दरभंगा, बिहार
स्वरचित एवं अप्रकाशित
===========
दो भाई
=====
: दो भाई थे एक अमीर और एक गरीब।
पितृपक्ष में दिखाया करने के लिए अमीर की पत्नी से पितृपक्ष के भोजन के लिऐ अपने मायके वाले जीमने बुलाऐ,खाना बनाने के लिऐ गरीब देवर की पत्नी को बुलाया,जब खाना बध गया तो देवर की पत्नी यह कहकर घर चली गई, कि मुझे भोग बनाना है,पितरों को जिमाना है।
जब शाम हुई तो पितृ आये, देखा अमीर बेटे के घर तो खाना खाने वालों का ताता लगा है।
फिर वो गरीब बेटे के घर गए वहां देखा,थोड़े से भोजन में ही होम कड्डें पर कर दिया।बहुत दुःखी मन से वो वहां से बिदा हुऐ।फिर जब सब पितृ एक जगह एकत्रित हुऐ,तो कैसा अनुभव रहा सबने बाँटा।गरीब बेटे के घर का अनुभव भी पिरतों ने बताया,तो सभी पितृ बोले,घर धन से भर भर जाऐ ।घर धन से भर जाऐ,और ऐसा बोलते,गरीब बेटे को आशीर्वाद देते चले गये।
इधर गरीब के घर बच्चे खाने के लिऐ अपनी माँ से कहने लगे।दुःखी मन से गरीब की पत्नी ने बच्चों से कहा,वहां देखो पतीला रखा है,जो कुछ हो मिल बाँटकर खा लेना।तब बच्चे पतीले देखने पहुंचे, तो पतीला धन से भरा था।सब बहुत खुश हुए।अगले वर्ष बहुत अच्छे से पितरों को जिमाया ,ब्राह्मण खिलाए पर घमंड नहीं किया।
*कथा का सार है,अधिक रुपया पैसा इंसान को अपने पथ से भटका देता है।*
*अपना स्वभाव हमेशा एक जैसा रखें*
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वंदना
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उन सब का वंदन अभिनंदन
जिनकी प्रेरणा से सीढ़ी दर सीढ़ी आगे बढ़ते आए
सबसे पहले माता पिता जिनसे
जीने के संस्कार हमने पाए
मां करती नवसृजन गढ़ती जीवन
पिता सदा सुरक्षा करते आए
और फिर वह शिक्षक जो हर मुश्किल में पल पल साथ देते
फूलों सा जीवन सजाते आए
डांट भी खाई गलतियों पर समझाया प्यार से
उन गलतियों से सीख ही सफल हो पाए अज्ञानी थे हम ज्ञान भरा हम में
अच्छा-बुरा क्या समझाते आए अंधकार सा जीवन था जब
वह जीवन रोशन करने आए
चंदन सा मन बन जाए हमारा
वह हमारे रहबर बनकर आए
आसमान की ऊंचाइयों को छूना कठिन नहीं
यही विश्वास हममें जगाते आए
अच्छे सच्चे इंसान हम बन जाएं
वह सदा सही राह दिखाते आए
आज करें हम उनका वंदन 'रानी' जिनके कारण
हम अपने सपने सच कर पाए
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कविता का शीर्षक है शिक्षक का जीवन में महत्व।।।।
ईश्वर संसार का निर्माता है,,, शिक्षक राष्ट्र का नीव करता है🙏 शिक्षक ज्ञान का भंडार है अपने ज्ञान से,, विद्यार्थी की नींव को मजबूत करता है💐 यह ज्ञान समृद्धि और प्रकाश का स्त्रोत होता है🙏 जो विद्यार्थी में बराबर बोता है🙏🙏
गुरु सामाजिक बौद्धिक, मानसिक रूप से हमें काबिल बनाता है 💐5 सितंबर शिक्षक दिवस होता है अज्ञान रूपी अंधकार मिटाता है💐 ज्ञान के उजास की ओर ले जाता है गुरु हमको जीना सिखाता है💐💐
अशिक्षित मानव पशु समान,,, गुरु बनाएं हमको इंसान,,,, कलम लेखनी का मतलब सिखाएं,,, जीवन में प्रकाश लाए💐💐 सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं उचित वर्तन भी बताएं💐
शिक्षक की महिमा बखानी न जाए,, यह अंधेरे को दूर भगाए गुरु बिन जीवन नाहो साकार यही सफल जीवन का आधार🙏🙏🙏 दिया ज्ञान का भंडार राष्ट्र बनाया शानदार🙏🙏
जिसकी छाया में मिले ज्ञान 💐कराता है स्वयं की पहचान💐 मिट्टी से बनाए सोना ऐसे गुरु को नहीं खोना🙏🙏 लक्ष्य भेदने का मार्ग दिखाएं,,, जीवन जीने की विधि सिखाएं👍👍👍
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गुरु होत सागर।
देते ज्ञान का गागर।
गुरु की कृपा अपार।
लगाते नैय्या पार।
गुरु होते जैसे कुम्हार।
देते हमें सुंदर आकार।
गुरु देते ज्ञान का दान।
मिट जाता मन का अज्ञान।
गुरु की गोद में खेलते प्रलय और निर्माण।
हाथ कंगन को आरसी क्या ,प्रत्यक्ष है प्रमाण।
राम कृष्ण आरुणि अर्जुन।
बनाते महापुरुष महान।
गुरु होते ईश्वर तुल्य यह मान।
बिन गुरु नहीं सम्भव है जीवन का सार।
गुरु की कृपा होती शिष्य पर अपार।
गुरु चरणों में मेरा बारम्बार प्रणाम।
आप की कृपा से मिला है मुझे नित नव आयाम।
हे!गुरुवर आपकी महिमा अपरम्पार।
आपके चरणों में नमन है बार-बार।
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🙏शीर्षक है,अय जिंदगी, 🙏
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तुम्ही तो हो,जो नया कुछ सिखाती हो,
खुल्ली पाठ शाला,हो,कहां रुकती हो,
हर हालात में कुछ,शिक्षा दे जाती हो,
अय जींदगी,, तुम्ही तो हो,..........
कभी रुलाती हो, कभी उपहार से भर देती हो,
कभी अबूध बालक, हरेक पशु पक्षी, पेड, पौधे,
अंतरकी आवाज, ये हमारी शिक्षक तो है,
अय जींदगी, तुम्ही तो हो,.........
ममता की चादर में लपेटे, मोम सा दिल को,
डट कर सामना करना शिखाया,
सबसे मेल ,मिलाप का ज्ञान भर भर के डाला,
अय जींदगी तुम्ही तो हो,............
मित्रो को गुरु बनाया, रुठना, मनाना, मान जाना,
लूंटना, बांटके खाना, दिल में कुछ न रखना,
अय जींदगी तुम्ही तो हो,.........
कक्षा में ज्ञान का आदान प्रदान,
अंदर छिपे अबूध बालक को,
जगाके चलना शिखाया,
अय जींदगी तुम्ही तो हो,.........
हर पल मुज से मिलवाया, हर पल जीना शिखाया,
हर उलझन का सामना, हसते रोते करना शिखाया,
अय जींदगी तुम्ही तो हो,.......
🙏🏻🌹स्वरचित रचना, 🌹🙏🏻
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परख
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सर्वप्रथम सभी प्रत्यक्ष एवं परोक्ष मेरे शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं-मंगलकामनाएं क्युकि जीवन पथ पर कदम-2 हम कुछ न कुछ किसी न किसी से सीखते रहते हैं अतः एसे समस्त को प्रणाम💐💐💐🙏🙏
बड़ा ही सुन्दर सा एक संस्मरण प्रसंगवश याद आया मुझे अभि.. जब मेने यह सिखा के जेसे हम हैं वेसे रहने में भी यदि हमारे गूण कोई परखना चाह्ता है परख ही लेता है.....☺️😊
✒️ विद्यालय मे छात्रासंघ बनना था आज ।
मेरिट के अधार पर केवल अध्यक्ष बनाये जाते थे; बाकी सभी पद मेरिट-सक्रियता एवं अन्योंन का मिला जुला निष्कर्ष होता था।
आज भी याद है मुझे सभी पूरी शिद्दत से कुछ दिनो से निर्वाचन पेनल की सेवदारि में लगे थे। मुझे भी मेरी खासम खास दोस्तों ने कहा लग जा मक्खन लगाने में पर जाने क्यूँ उस तरफ सोचा तो लगा केसे🤔🙄🙄😀😀
जब बात चली सचिव पद की ,
मेरे मिटिंग में देरी से पहुचने पर भी मेरी राह देखते हुये मुझे निर्वाचित किया गया।
जिसके लिये मतदान भी हुआ किन्तु मुझे बाकियों से अधिक मत मिले थे बड़ा ही अजीब था क्युकि बडे ही अच्छे लोग मेरे समानांतर थे जो वाक पटु थे और मेरे खयाल से योग्य भी थे।
जब प्राचार्या जी एवं निर्वाचन पेनल ने निर्वाचित संघ को बधाई दी सभी के बारे में कुछ कहा तब मेरे चुने जाने की बधाई देते हुये यह कहा की चाटुकारिता, और संस्कार-विनम्रता- कृतज्ञता में बहुत बारीक सी रेखा का ही अन्तर होता है जिस पर नयी सचिव खरी उतरती हैं यह सदा एक सा ही व्य्हवार लिये होती है , इसने अचानक कोई ज्यादा सम्पर्क नही करना शुरु कर दिया और नही ही नामित होने पर घमंड ही किया हो , को कह मुझे कुछ नया अध्याय फ़ीर पढा दिया था।
कदम कदम पर कुछ न कुछ सिख देने वाले एसे मेरे समस्त शिक्षकों को मैं सदा नतमस्तक हो प्रणाम करती रहूँगी🙏🙏🙏
चाहे महाविद्यालय हो या विद्यालय सभी को आज भी मैं दिल से उतना ही याद करती हूँ;
कुछ पनग्तियाँ:'
कभी-2 लगता है फ़ीर उन्ही क्लासेस में जा कर बेठ जाएँ वो सब दोस्त वेसे ही फ़ीर मिल जाएँ और शिक्षक वेसे ही फ़ीर से क्लास लगाये, कब पिरेड्स ओवर हो जाएँ और हम गार्डन की बेंचौ पर चढ़ कर बेठ जाएँ
केसे?-2? केसे कहाँ से फ़ीर वो दिन लौट आय जब हम फ़ीर से क्लासेस सजाए शिक्षक दिवस मनाएं......☺️☺️☺️🙏🙏
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जज्बातों
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"अल्फाजों के फूलो से जज्बातों के गुलदस्ते मैने सजाए है , हे गुरुवर आपके चरणों में भावों के मैने पुष्प चड़ाए है! गुरु ने हो तो अपने आयामों से नए आगार बनाए है, स्वयं तपे लौह स्वरूप ओर शिष्यों के जीवन में कुंदन के नग जड़वाए है ! यदि गुरु न होते तो फिर ज्ञान कहा हो पाता ,गुरु आपने ही गोविंद के दर्शन कराए है ! गुरु की महिमा का क्या गुणगान करू ,गुरु ने ही तो सुभाष ,अटल, कलाम बनाए है! गुरु ज्ञान पाने को तो ईश्वर स्वयं गुरु आश्रम आए है,पाकर विद्या दान गुरु से ,ईश्वर ने शीश झुकाए है ! स्वयं जले दीपक बनकर ओर शिष्य मार्ग प्रशस्त कराये है ,गुरु ने शिष्य को ध्रुव तारे ओर सूर्य सरदश्य बनाए है ! बारम्बार नमन गुरुवर को क्योंकि गुरु में ही ब्रम्हा ,विष्णु ,महेश समाए है! तभी तो कहते है "गुरूर ब्रम्हा ,गरूर विष्णु ,गुरूर देवो महेश्वर ,गुरूर साक्षात परब्रह्म , तस्मै श्री गुरुवे नम :" ईश्वर ने भी तो गुरु के यशगान गाए है ! इन्हीं पंक्तियों की पुष्पांजलि समस्त गुरुओं को अर्पित करते हुए स्वरचित कविता की प्रस्तुत कर्ता*"साधना श्रीवास्तव
==========
[
तुम्हें प्रणाम 🙏 हो ,हे शिक्षक जन!
करबद्ध हो, करें कोटिश: नमन 🙏
तुम्हें प्रणाम 🙏 हो ,हे शिक्षक जन !
प्रथम शिक्षा का घर पाठशाला
मात - पिता ने हमको पाला7
दुर्गुणों का , कर परिमार्जन
सद्गुणों का करते अंजन
सर्वप्रथम उन्हें ,चरण वंदन
तुम्हें प्रणाम 🙏हो ,हे शिक्षक जन!
करबद्ध हो करें कोटिश: नमन 🙏
अक्षर से परिचित करवा कर
दाग़ निरक्षर का हो मिटाते ,
गुरु- शिष्य का पावन रिश्ता
क्या है? यह हमको समझाते
तुम्हें प्रणाम 🙏 हो हे शिक्षक जन!
करबद्ध हो, करें कोटिश: नमन 🙏
अज्ञान- तिमिर , करके हरण
तुम प्रज्ञा मन में हो फैलाते
भले- बुरे का भिन्न कर अंतर
सत्य-प्रगति पथ राह दिखाते
तुम्हें प्रणाम 🙏 हो,हे शिक्षक जन!
करबद्ध हो, करें कोटिश: नमन 🙏
इनके तप-कर्तव्य से तपकर
शिष्य है होता शिष्ट - महान,
देश के जन- जन को शिक्षित कर
करते देश का ये कल्याण ।।
तुम्हें प्रणाम 🙏 हो,हे शिक्षक जन!
*पायल परदेशी
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*आज की शिक्षा*
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बच्चो में संस्कार डालने में शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका है,यदि शिक्षक साधना करने वाले हों तो उनके लिए यह सहज ही सम्भव है,किन्तु आज की शिक्षा व्यवस्था भारतीय संस्कृति से दूर होती जा रही है,
हम अपने जीवन मूल्यों की अनदेखी कर रहे हैं,
आज की दौड़ धूप भरी जिंदगी में संस्कारवान पीढ़ी दिखाई नहीं देती है,माता पिता के नौकरी पर जाने के कारण बच्चों प्र ध्यान नहीं दे पाते हैं,सिंगल फ़ैमिली के कारण घर में संस्कार विकसित करने वाले दादा दादी, नाना नानी नहीं रहे,इस कारण बच्चों को झूलाघर में छोड़ना पड़ता है
या को बच्चे घरों में रहते हैं वो मोबाइल,टीवी और लैपटॉप पर लगे रहते हैं,सही गलत बताने वाला कोई नहीं होता है,आज की शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें बच्चों के भविष्य निर्माण में सहायता मिले,आज बच्चे मानसिक रूप से बीमार होते जा रहे हैं,वो पढ़ाई और कंपटीशन के चक्कर में बोझ तले दबे जा रहे हैं,उनको पढ़ाई बोरिंग लगने लगी है,
आजकल शिक्षा प्रसार की नई नई योजनाएं बन रही हैं,परंतु सोचना यह की वर्तमान शिक्षा जीवन निर्माण में कितना योगदान देगी,ऐसी शिक्षा दीक्षा का विधान करना होगा जो हमें स्वयं पर विजय प्राप्त करने के लिए प्रेरित करे,ज्ञान का अंतिम लक्ष्य चरित्र निर्माण ही होना चाहिए,शिक्षा व्यवस्था को तीन भागों में बांट दिया जाए शारीरिक शिक्षा,मानसिक शिक्षा और आध्यात्मिक शिक्षा,
शारीरिक शिक्षा का ध्येय शरीर को सुव्यस्थित रखें जैसे योगा, खेल कूद, प्रात उठकर अपने काम करना, मानसिक शिक्षा का उद्देश्य बच्चे का उचित रीति से विकास होना,सही गलत विवेक पूर्ण कार्य करने से है,आध्यात्मिक शिक्षा का उद्देश्य बच्चों में बड़ों का आदर सम्मान व्यक्त करना आना चाहिए,
अंत में यही कहना चाहूंगी कि शिक्षा केवल काम चलाऊ ना होकर भली प्रकार से जीवन जीना सिखाए,*विद्या वही है जो इस दुनिया की चिंता से मुक्त करके हमारी जीवन नैया को भवसागर से पार लगाने में समर्थ हो *स विद्या या विमुक्तये*
इंदौर
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"गुरु की वंदना "
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कभी मृदुल, कभी कठोर
कभी निर्मल कभी निष्ठुर
सभी रास्तों से परे होती हैं
गुरु की वाणी भिन्न होती है।
कभी पिता की महानता
कभी बहन कभी मां की ममता
कभी ईश्वर का मान कराती
गुरु संगति आसमां तक ले जाती।
जो घिरे हो कभी धर्म युद्ध में
जो उलझे हो कभी प्रश्नों में
जब दुनिया की नीरसता का एहसास होता
गुरु का मार्गदर्शन आशा की किरण जगाता
जो गुरु शब्द से गुणों की खान हो
जिनके चरणों में प्रभु का मान हो
जो हमें हर मुश्किल से बाहर लाते
गुरु को हम शत शत नमन करते।
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Himan A: Himani ka Sabri ko Namaskar dosto
Aj me Prastut hue hu purani yado ke sath
Meri shiksha sarkari school me hue he, humane shikshako ke bare me kuch bate sajha karugi,
Hanari teacher ek Nariyal ke saman jo ki bhar se to kathor or Anadar se naram thi, bade2 Shetan bacho ki bhi juban apne teachers ke samne nahi khulti, pure school me anushasan rehta tha, jo bhi anushasan ka paln nahi karta uske liye bet rakhi thi ops aj bhi us bet ki mar yad he , us mar ke dar se hum anushashit rehne ki koshish karte.
School me jab koi program hote hm bhot utsahi rehte
Kuch bache program me Pesa contri nahi kar patr to teacher hi apne jeb se mila kar unhe enjoy karati
Kabhi uch nich ka bhed hone diya kai Garib vidhyarthi ko free shiksha pradan ki
Anand mela kiya jata tha par kuch vidhyarthi nahi khrid pate techwrs khud kharid kar bachho ko khilati.
Teacher or studen ke bich ka prem jo Pehle tha vo ab nahi najar aata he
Humare teacher ne niswRth bhav se jo shiksh bati he,
Hm unki shikshase labhanvit hue he.
Moka milnepar mebhi kuch esa prayas karugi jo humare shikshak ne kya he
Happy teacher's d
*Himani Bhatt
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*क्या पाया क्या लौटाया*
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सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी
को समर्पित यह प्यारा दिन
लोकतंत्र से सर्वोच्च पद पर
एक शिक्षक हुए आसीन
5 सितंबर जयंती आपकी
सदैव हमारे साथ
शिक्षकों के सम्मान में
मिली अमूल्य सौगात
जीवन के पथ पर चलते रहने का
जिसने मार्ग बताया
यह सम्मान मेरे प्रथम गुरु
माता-पिता ने पाया
व्यक्तित्व को आकार देने का
जिसने कार्य निभाया
यह सम्मान
शिक्षक के खाते में आया
विभिन्न पड़ाव पर
संजीविनी देने का
जिसने कार्य निभाया
इसका श्रेय मित्रो ने पाया
जाने अनजाने राहों में
जिससे कुछ सीख पाया
इसका श्रेय अपरिचितों
के खाते में आया
तारीफ करने वालों से
जब गया लुढ़काया
आलोचक बने कुछ साथी
और मैं संभल पाया
जिंदगी के उतार-चढ़ाव में
जब भी में डगमगाया
समय अनुभव ने
अपना कार्य निभाया
जब भी मन ठहरा भटका
सन्यासी के विरक्त भाव से
पाई अमूल्य प्रेरणा
और मैं नहीं डगमगाया
हर पड़ाव पर सब से सीखा
सबसे समझा सबसे कुछ पाया
यह समाज को लौटाना आना है
यह समझ में आया
शिक्षक बनकर मैंने अपना
यह फर्ज भी निभाया
और जिससे जितना पाया
कुछ तो वापस लौटाया
कभी नहीं उतरेगा यह ऋण
यह समझ में आया
बस इतनी संतुष्टि है
कुछ तो उतार पाया
*डॉ विजय आर चौरे
===========
गुरु महिमा
💐💐💐💐
श्री गुरु चरणों में वंदन, अभिनंदन ,।
श्री गुरु चरण रज हे उत्तम चंदन ।
💐💐
इस दिवस की पावन बेला हे सुवर्ण मयम,
हे मेरे गुरुवर आप हे, साक्षात् बृह्ममयम।
💐💐
अलौकिक रुप माधूर्य हे, आंनदकरणम,
ह्रदय स्वच्छ निर्मल हे, शितलीकरणम ।।
💐💐
दर्शन आपका सदा हे, हमको मंगलकरणम,।
ज्ञान ज्योति का प्रकाश हे,हमारा अंलकरणम।।
💐💐
वाणी में हे आपकी रस, अमृतमयम ।
मेरे आधार स्तम्भ हो ,श्री गुरुवरम ।।
💐💐
करुणा करके देते हो आशिष ,श्रृद्धा सुमन,
पाकर आशिष आपका, हे देह आज ये कुंदन।।
💐💐
आपकी कृपा से शब्द बनते हे , गितम ।
हे बृह्म जो,अब बन गए हे प्रितम ।।
💐💐
परम् पूज्य भाई श्री आपके चरणों में सदा ही
वंदन वंदन। वंदन......💐🙏🏻
जय श्री कृष्णा ।
*बिन्दु मेहता .... 🙏🏻
==================
शिक्षक दिवस के अवसर पर
=====
जिन्होंने तुम्हें इस लायक बनाया
क्यों बनाओ तुम उनका मखौल
तुम करोगे सदा आदर उनका
आओ, खाओ तुम ये कौल।
तुम तो थे माटी था एक लौंदा
न रूप था ना आकार
हर एक गुरु ने ढाला तुमको
तो तुम बन पाए हो साकार ।
कभी बनते हैं यह माता-पिता
कभी भाई बहन तो कभी हमदम
गुस्सा,प्यार,दुलार की आग में
तपा ,बना रहे तुमको कुंदन ।
चाहे हो लो तुम नतमस्तक
या ले लो उनके चरणों की धूरी
धोओ पद पंकज उनके
करो जीवन भर के आशा पूरी ।
हो ना पाओगे उऋण
ऐसा कर्ज तुम पर चढ़े
एसे तुम्हारे शिक्षक वृंद
सब उनके चरणन पड़े ।
आदर देने से आदर बढ़ता है
क्यों आज भूल गए तुम
माता-पिता से ऊपर है वे
कैसे रिश्ता तोड़ गए तुम ।
ये फिर भी ना भूलेंगे
अपना कर्तव्य निभाना
भारत का गौरव पहचानो
सत धर्म पर खुद को चलाना।
स्वरचित
इंदौर
= = ============
जीवन
====
संस्कारित शिक्षा से सिंचित कर गुरु बने जीवन आधार
गुरु बन इस पुण्य धरा पर "उज्जवल भविष्य के कुंभकार
कर्म अलौकिक जग में गुरु का सुरभित करें जीवन संचार
संस्कार का दीप करें प्रज्वलित, किया इस जगती का उद्धार
गुरु बिन इस जगत में छा जाता घोर अंधकार
तिर गए हम कटीला जीवन गुरु ही है पतवार
कच्ची मिट्टी थे हम ना कोई हमारा वजूद था
कुम्हार बनकर इस मिट्टी को गुरु ने आकार दिया
शिक्षा की चाक से सींच कर जीवन हमारा संवार दिया
उम्मीदों को नए पंख देकर बच्चों के मन को गुरु है पढ़ता
आशा और विकास की अनगिनत नई इबारतें हैं गढ़ता
कर्तव्य पथ पर अविरत बढ़कर, सन्मार्ग की सीढ़ी चढ़ाता
रिश्ता मेरा और गुरु का ,जैसे दीपक- ज्योति ,सीप और मोती
बिन सावन छाए जो पतझड़ गुरु ही सुंदर फूल खिलाए
ज्ञान ज्योति के सागर से ही धरती से चांद तक पहुंचाएं
गुरु का क्या गुणगान ,बखान करूं, गुरु चरणों में नित्य शीश धरूं
अंधकारमय जीवन से ,गुरु ज्ञान से ही मैं इस दुनिया से तरूं
*(स्वरचित-प्रिती धीरज जैन
========
विषय- प्रकृति और शिक्षा में सुधार
=====%
प्रकृति ये सपने से सुंदर
खो न जाए कहीं उलझकर,
नासमझी की बातों में
स्वार्थीपन की घातों में।
पक्षी पानी पेड़ और पौधे
शिक्षक बन शिक्षा ये देते,
इनकी शिक्षा सबसे बढ़कर
करो परिष्कृत सोच समझकर।
बाँध बनाओ पेड़ लगाओ
फूलों से भर दो ये दुनियाँ,
दीर्घायु हो धरा हमारी
सुख से जीयें सारी पीढ़ियाँ।
पालीथिन से इसे बचा लो
कचरा कभी न इसमें डालो,
जीवन कूड़ा हो जाएगा
प्यारे पीछे पछताएगा।
प्रकृति हमारी पाठशाला
माँ सी ममताधारी है,
हम सब विद्धार्थी हैं इसके
शिक्षा देती न्यारी है।
=================
गुरु वंदन
------
शत् शत् वन्दन उस गुरु का
जो दिखाए प्रगति का छोर।
जीवन में किसी मोड़ पर
यदि कदम बढे अन्धेरे की ओर।
दिखलाए गुरु मार्ग ज्ञान का
ले जाए उजियाले की ओर।
शत् शत् वंदन
जीवन में माँ बने प्रथम गुरु
शब्दज्ञान से साधे जीवन डोर।
द्वितीय वंदन करें पिता को
प्रशस्त करे जो शिक्षा की ओर
शत् शत् वंदन
नमन प्रकृति को और सृष्टि को। प्रभु बसे गुरु रुप मे सब ओर।
मेरे जीवन के सभी शिक्षकों को हृदयतल से मेरा
शत् शत् वंदन
========
आदर्श शिक्षक
********************
राष्ट्र का निर्माता शिक्षक
बाल जीवन संवारता शिक्षक
आदर्शों की मिशाल बनकर
महकता और महकाता शिक्षक
सदाबहार फूलों -सा खिलकर
अज्ञानता को दूर भगाता शिक्षक
नित नये आयाम लेकर हर पल खूबसूरत , भव्य बनाता शिक्षक
अनमोल ज्ञान का धन हमें देकर
खुशियां खूब मनाता शिक्षक
चोरी, अपराध, पापऔर लालच से डरने की
धर्मों की सीख सिखाता शिक्षक
प्रकाशपुंज का लौ बनकर बनकर
कर्तव्य अपना निभाता शिक्षक
प्रेम सरिता की धारा बनकर
नैया को पार लगाता शिक्षक
देश के लिए मर मिटने की
बलिदानी का राह दिखाता शिक्षक
शिक्षक हैं शिक्षा का सागर
बांटें ज्ञान शिक्षक बराबर
शिक्षक न देखें जात-पात
शिक्षक न करता पक्षपात
निर्धन हो या हो धनवान
शिक्षक को सब एक समान
प्यासे को जैसे मिलता पानी
शिक्षक हैं वहीं जिंदगानी
शत-शत नमन वंदन से शिक्षक!!!
डॉ मीना कुमारी'
===========
"क्या बेटा, बाहर देखने में ज़्यादा आनन्द आ रहा हो तो बाहर ही निकल जाओ, क्लास में बैठे बैठे बोर हो गये होगे।"
"किस बात की हँसी आ रही है हमें भी तो बताओ थोड़ा हम भी हँस लें....."
"कॉपी घर पर भूल आए के अलावा कोई बहाना हो तो बताना होमवर्क न करने का"
"आज आप लोगों का सरप्राइज़ टेस्ट है।"
"हमारे ज़रा सा बाहर जाते ही क्लास को मच्छी बाज़ार बना देते हो, इतवारिया हाट लगा है यहाँ? सब खड़े हो जाओ।"
"मुझे क्लास में पिन ड्रॉप साइलेन्स चाहिये।"
"सारे नमूने मेरी क्लास में आकर भरने थे।"
"माँ बाप का खूब नाम रौशन करोगे बेटा, हरकतें बता रही हैं। क्यों उनकी मेहनत की गाढ़ी कमाई बर्बाद कर रहे हो?"
"ये राइटिंग है तुम्हारी, कि कनखजूरा चलकर गया है कॉपी से, और ये तुम लिखो ख़ुदा बांचे टाइप क्या है? और तुम, माइक्रोस्कोप लाएं लैब से पढ़ने को?"
"खाना खाना भूले थे? होमवर्क कैसे भूल गये?"
"किताब कहाँ है? घर पर दूध दे रही है क्या?"
"आप लोगों को क्या लगता है टीचर मूर्ख है, यूँ ही बकबक करते रहते हैं?"
"ज़ोर से पढ़ो यहाँ तक आवाज़ आनी चाहिये, मस्ती में तो बहुत गला फाड़ते हो, पढ़ने में क्या हो जाता है? मम्मी ने टिफिन नहीं दिया आज?"
"हाँ तुमसे ही पूछ रही हूँ खड़े हो जाओ, इधर उधर क्या देख रहे हो, आंसर दो।"
"कल से तुम दोनों को अलग अलग बैठाएंगे, पिकनिक मनाने आते हो पढ़ने थोड़ी।"
"अगर वह कुंए में कूदेगा तो तुम भी कूद जाओगे?"
"इतने सालों में कभी इतनी ख़राब क्लास और इतने ढीठ बच्चे नहीं देखे।"
जैसे शाश्वत अजर अमर कालजयी वाक्यों के प्रणेता सभी शिक्षक- शिक्षिकाओं को हैप्पी टीचर्स डे रहेगा।
*अखिलेश शर्मा
============
गुरु वंदना ।।
___
गीतकार सुरेश अजनबी इंदौर
__________________
मेरे गुरुवर है ऐसे निराले कोई उनसा निराला नहीं है ।
ऐसे जपने है माला वो भगवन कोई हाथो में माला नहीं है ।
1
ना ही पीते है भांग धतूरा
फिर भी मस्ती में रहते है पूरा ।
ना गले में कोई नाग काला ,तन पे भस्मी ओर न ही मृगछाला।।
मन के ऐसे है भोले भंडारी कोई उनसा शिवाला नहीं है ।।
2
मुख पे रहती है भजनों की मुरली ,तान मिश्री सी मीठी सुरीली ।
कर्म का ही बिछाते है आसन ,फ़र्ज़ का थाम रक्खा है दामन ।
प्रेम की रोशनी से है रोशन ,कोई उंनसा उजाला नहीं है ।।
3
तुमने उपदेश ऐसा सुनाया ,कितने सोते हुवे को जगाया ।
तुमने इंसा को इंसा बनाया ,इसलिए में शरण तेरी आया ।
ऐसा हांका है अज्ञानता को कोई उन सा गवाला नहीं है ।।
मेरे गुरुवर है ऐसे निराले कोई उन सा निराला नहीं है ।।
============
गुरु वंदना
=====
गुरूः ब्रह्मा गुरूः विष्णु,
गुरूः देवः महेश्वरः ,
गुरूः साक्षात परम ब्रह्म
तस्मै श्री गुरवेः नमः ।
मेरे गुरुवर दीनदयाल ,
काग से हंस बनाते है ।
काग से हंस बनाते है,
वचन अनमोल सुनाते है
ज्ञान की जोत जलाते है।
मेरे गुरु वर ----
अजब है गुरूओं का दरबार,
भरा है ज्ञान का भंडार ,
वचन अनमोल सिखाते है।
गुरुजी देते सत का ज्ञान
जिससे हो सबका कल्याण ,
वो अमृत दिव्य पिलाते है
ज्ञान की ज्योति जलाते है।
तुम करलो गुरू चरणों
मे ध्यान ,
करों तुम उनका सम्मान ,
वो सच्चा मार्ग बताते है ,
तम को दूर भगाते है
हम शरण मे शीश नमाते है ।
मेरे गुरुवर दीनदयाल काग से हंस बनाते है ।
*मनोरमा जोशी
====================
देवतुल्य गुरुवर आपको प्रणाम
शिक्षक दिवस ५ सितम्बर ,त्योहार गुरु वन्दना का,प्रतीक गुरु शिष्य के स्नेह का।
शिक्षक एक निस्वार्थ तपस्वी,दें,सबको समान शिक्षा,
भूमिका राष्ट्र के भावी निर्माता गड़ने की ।
सबसे सुंदरतम पेशा शिक्षक का,
पाता हे सम्मान,सराहना,प्रसंशा।
देवतुल्य गुरुवर आपको प्रणाम
गुरु सिखाते हे ध्यान पूर्वक पडना,गुन्ना,
ओर वर्तमान पल में जीना।
गिरती,झुकती,कच्ची डाली को सम्भालकर,
ज्ञान का टेका लगाकर दिशा देते हे।
देवतुल्य गुरुवर आपको प्रणाम
एक विध्यर्थी कच्चीमिट्टी का घड़ा होता हे,
उसे अपने ज्ञान की आँच से गुरु पकाता हे।
गुरु सानिध्य में आलोकित ज्योति,
शिष्य वरवस ही सीप का मोती।
देवतुल्य गुरुवर आपको प्रणाम
गुरु का पाठ जीवन भर ना भूले,
गुरु ने अद्भुत दीप प्रज्वलित किया,छटा अंधकार।
राहें प्रशस्थ,समूचे जीवनउजियार,
अनाड़ी,बुद्दु को बना दिया राजकुमार।
देवतुल्य गुरुवर आपको प्रणाम
शिक्षक जैसा सच्चा संत नही,चहुमुख़ी विकाश कराया
शिक्षा का लक्ष्य,मुक्त परिंदे क़ो अनुशासन का पाठ पड़ाया। ये सब गुरबर की पेनि नज़र का हे,आज जो परिस्कृत्य हे,गुरु की मेहनत का परिणाम उ।
देवतुल्य गुरुवर आपको प्रणाम
आधुनिक युगमेंशिक्षक की भूमिका अत्यधिक चुनोती पूर्ण हे,उन्हें बिध्यर्थी के ज्ञान कोशल को वड़ाकर,उसकेसकारात्मक व्यवहार क़ो बड़ाना हे,
हम विश्व गुरू वन्ने जा रहे हे ।
नेफ घोसना के बाद यवहारिक मुद्दो क़ा ध्यान,
मिले अनुकूल बतावरण।भारतीय संस्कृति ओर विज्ञान। व्यापकहोगा ।
गुणवत्ता ओर लागत के मामले में दक्षहोगा,
सस्ती क़ीमत,अफ़ोरदेवल परिमियम शिक्षा प्रदान करने का लक्ष्य हे
*निर्मल सिंघल
Oooooooooooooooooooooooooooooo
प्रथम गुरु है जननी मेरी ,
पिता भी हैं गुरु रूप।
छाया बन सर पर रखते कर ,
जब संकट बनते धूप ।
संस्कारों से जीवन रचते ,
सद्गुण हैं बतलाते ।
मार्ग सुगम करते जीवन का ,
राह सही दिखलाते।
विद्यालय हैं ज्ञान के मंदिर ,
शिक्षक हैं भगवान।
विद्या अर्जित करते हैं ,
बन जाते हैं धनवान।
विद्या धन से पूर्ण हमारा
जीवन गुरु करते हैं ।
जीवन की गागर में
ज्ञान का सागर गुरु भरते हैं।
मित्र हमारे गुरु रूप में
साथ सदा चलते हैं।
कठिन राह पर हाथ थामते,
दीपक से जलते हैं।
नमन है उन सबको जो
जीवन मे गुरु रूप में आए।
आओ हम अपने गुरुओं के
सम्मुख शीश झुकाएं।
अचला गुप्ता
इंदौर

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