Sunday, September 6, 2020

संस्मरण

*मेरे आदर्श शिक्षक* 

एकमप्यक्षरं यस्तु गुरुः शिष्ये निवेदयेत् । पृथिव्यां नास्ति तद् द्रव्यं यद्दत्वा ह्यनृणी भवेत् 

यदि एक अक्षर का ज्ञान भी शिक्षक के द्वारा कराया जाए
तो भी संसार में ऐसी कोई वस्तु नहीं है जिसके द्वारा शिक्षक के ऋण को उतारा जा सके

आज मैं आप मेरे आदर्श शिक्षक व मेरे जीवन की उस घटना के बारे में बताने जा रही हूं जिसने मेरे जीवन की दिशा बदल दी।
बात काफी पुरानी है, जब मैं कक्षा सात की विद्यार्थी थी, ये वह उम्र होती है जब लड़के और लड़कियों का अन्तर थोड़ा थोड़ा समझ में 
आने लगता हैं।मेरे मम्मी पापा की पोस्टिंग एक ऐसे कस्बे में थी जहाँ एक ही को एड सरकारी स्कूल था, उसी में मैं पढ़ती थी।
वहां पर गिनी चुनी लड़कियाँ और ढेर सारे बड़ी उम्र के लड़के पढ़ते थे
मेरी क्लास में तीन
लड़कियाँ और बत्तीस लड़के थे।
मेरा घर स्कूल के पास ही था इसलिए मैं डेढ़ बजे लंच टाइम में घर आकर खाना खाती थी।
लंचटाइम में स्कूल का मैदान लड़कों के झुंड से भर जाता तो मैं मुख्य द्वार से न निकल कर पीछे के लम्बे रास्ते से घर आती जाती।मेरे अग्रेंजी टीचर  श्री मिश्रा जी थे जो बहुत अनुशासन प्रिय एवं कठोर व्यवहार के शिक्षक माने जाते थे।एक दिन में स्कूल के पिछले रास्ते से घर जा ही रही थी कि मिश्रा सर की कड़क आवाज आई "अर्चना इधर आओ"
मैं डरते डरते उन तक पहुंची वे बोले कहां जा रही हो। मैं बोली ,घर सर
उन्होंने कहा कि मैं पिछले दस दिनों से तुम्हें पीछे के रास्ते से
घर जाते हुए देख रहा हूँ मेनगेट से क्यों नहीं जाती,एकदम सच बताओ क्या बात है? 
थोड़ी देर न नुकर के बाद मैं बोली कि सर मुझे डर लगता है।
वे बोले डर किससे?भीड़ से या लड़कों से। मेंने कहा दोनों से। मेरा इतना कहते ही उनकी कड़क आवाज ममता से भर गई,मेरे सिर को सहलाते हुए बोले कि तुमने तालाब की काई देखी है, कितनी घनी रहती है लेकिन जैसे ही कोई उस तक पहुंचता है वह अपने आप हटती जाती है, देखो ये लड़कों की भीड़ काई है।तुम अभी बहुत छोटी हो,जीवन में हर जगह, इस तरह की बेकार भीड़ से तुम्हारा सामना होगा तुम आत्मविश्वास से आगे बढ़ना,इनकी आंखों में आंखें डाल कर, ये काई की तरह दूर हट कर तुम्हें रास्ता देंगे , चलो मैं खड़ा हूँ अभी निकलो इनके बीच से।उस दिन मिश्रा सर ने जो आत्मविश्वास का बीज मेरे अन्दर बोया आज वो विशाल वृक्ष बन चुका हैऔर आज जो मेरी सख्शियत है ये उन्हीं की देन है।
मिश्रा सर आज इस 
दुनिया में नहीं हैं पर वे आदर्श शिक्षक थे ,हैं और रहेगें ।मेरा उनको शत शत नमन।

डॉ.अर्चना श्रीवास्तव
इन्दौर

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