Wednesday, August 12, 2020

शुभ संकल्प समूह ,श्री कृष्ण जन्माष्टमी e_book

कृष्ण जन्म  
ताँका
____

नन्द गोपाल
भादों की है अष्टमी
श्याम सलोने
उमड़ घुमड़ के
बादल बरसे रे

प्रहरी सोये
नींद में खो से गए
कान्हा आंयो रे
पालकी में बिठायो
देवकी हर्षायो रे

कृष्ण कन्हैया
कारागार में हुआ
लाल का जन्म
वासुदेव सूपडा़
यमुना हुईं खुश

कान्हा मुस्कात
यमुना कल कल
बहती जाए
गोकुल बाज रही
बृजवासी गायो रे

भोर अंगना
चित्तचोर नाचत
वंशी बाजत
ग्वाल बाल सखियां
मृदंग बजावत

*डा अँजुल कंसल"कनुप्रिया"
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कृष्ण गुहार 
_____

आज की स्थिति को देखते हुए कृष्ण से गुहार:
आ जाओ कृष्ण तुम एकबार
फिर बंसी बजाओ एकबार
कितनी करुणा कितने संदेश
पग-पग पर बिखरे पड़े अनेक
हर प्राणों का वह तार-तार
सुनना चाहे अनुराग राग
पाना चाहे मधु स्वर पराग
आ जाओ कृष्ण......
फिर बंसी बजाओ.....।
आंसूं कर रहे हैं पथ पखार
गीता के निष्काम कर्म को
भूला बैठा है यह संसार
त्याग-तपस्या की सांसों के
दिन भी बचे हैं चार
आ जाओ कृष्ण......
फिर बंसी बजाओ......
तुम जो आ जाते एक बार
हंस उठते पल में आद्र नयन
धुल जाता ओंठों से विषाद
आ जाती जीवन में बहार 
लुट जाता सब संचित विराग
आ जाओ कृष्ण.....
फिर बंसी बजाओ....
.   *लीला कृपलानी 
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तुम श्याम बनके आना
__________

 जीवन के वृंदावन में, बहार बनके छाना,
 राधा तो बन गई मैं ,तुम श्याम बनके आना, गोकुल की गलियों में ,भंवरों के गुंजन में ,
नयनों के काजल में ,कोलाहल पनघट में ,
बरखा की फुहार में ,श्वासों के सरगम में,
 पेड़ों के झुरमुट में, लोगों की आस्था में ,
बांसुरी की धुन पर, मुझे तुम रिझाना ,
राधा तो बन गई मैं ,तुम श्याम बनके आना ।
प्रेम ही वृंदावन ,कृष्ण की भक्ति है ,
मन के भावों की ,सुंदर अभिव्यक्ति है,
 सृष्टि के कण-कण में ,प्रेम विद्यमान है,
 वशीकरण मंत्र है, जीवन की शक्ति है ,
प्रेम का संदेश, घर-घर पहुंचाना ,
राधा तो बन गई मैं, तुम श्याम बनके आना ।
प्रेम ही ईश्वर है ,प्रेम शुद्ध साधना,
 प्रेम ही विश्वास है ,प्रेम है आराधना,
 दिल की गहराइयों में ,खुशियों का खजाना,
 प्रेम है समर्पण ,प्रेम सच्ची भावना,
कृष्ण की भक्ति में ,सब रंग जाना ,
राधा तो बन गई मैं ,तुम श्याम बनके आना।

* श्रीमती शोभा रानी तिवारी
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 🥳बाजे गोकुल धाम में बधाई,🥳
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कृष्ण प्रभु ने अवतार लिया,कर्म सिद्धांत बताकर जग जीवों को तार दिया
ओहो,,,ओहो,,,ओहो,,,ओहो,,,
गोपाल मेरा पालने में झूले रे,,,
गोपाल मेरा पालने में झूले रे,,,
साँवला, सलोना कान्हूडा मेरा
पालने में झूले रे,,,यशोदा मैया,,लोरी गाये,सुलाएरे,,,,
गोकुल धाम में झूला सज़ा, झुलाए रे गोप गोपियां
हरे भरे पेड़ पर ऊंची लटकाई
दही हंडियां
दही हंडिया टूटते ही,दर्शन कर मन डोल रहा,उस कान्हा में
कुछ पागत है,कुछ झूमत है
आओ ,गाओ,खुशी के गीत
आलकी की पालकी जय कन्हैय्या लाल की🥳🎊🙏🏻
*प्रभा जैन 
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*जन्माष्टमी व्रत कब मनाया जाए*
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यह व्रत भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को किया जाता है। भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी बुधवार को रोहिणी नक्षत्र में अर्धरात्रि के समय में वृष के चंद्रमा में हुआ था अतः अधिकांश उपासक उक्त बातों में अपने अपने अभीष्ट युग का ग्रहण करते हैं । परंतु शास्त्र में इसका दो भेद है एक है सुद्धा और विद्धा। सुद्धा मतलब यह है कि उदय से उदय पर्यंत अष्टमी हो तो सूद्धा कहलाता है। और सप्तमी या नवमी युक्ता अष्टमी हो तो  विद्धा कहा जाता है। समान समान और न्यून अधिक भेद से तीन प्रकार है। यदि परंतु सिद्धांत रूप में तत्काल व्यापिनी अर्धरात्रि में रहने वाले तिथि को ही अधिक मान्य होती है। वह यदि 2 दिन का हो या दोनों ही दिन में ना हो तो सप्तमी विद्धा को सर्वथा त्याग कर नवमी विद्धा को ग्रहण करना चाहिए।

 हमारे अनेक अनेक पुराणों में भी इसका वर्णन है।

माधव का मत है कि अष्टमी दो प्रकार की है पहले जन्माष्टमी और दूसरी जयंती इसमें पहले केवल अष्टमी को ही माना गया है।
स्कंद पुराण में भी यही बात कही गई है

 निर्णय सिंधु में कहा गया है कि यदि दिन या रात में कला मात्र में भी रोहिणी  हो तो विशेषकर चंद्रमा से मिली हुई रात्रि को मान लेना चाहिए।

 भविष्य पुराण में कहा गया है कि भाद्रपद मास के कृष्ण जन्माष्टमी व्रत को कहा गया है।   केवल जन्माष्टमी में ही उपवास करना है। यदि वह तिथि रोहिणी नक्षत्र युक्त हो तो जयंती नाम से कही जाती है।
 बन्ही पुराणों में कहा गया है कृष्ण पक्ष की अष्टमी यदि एक कला भी रोहिणी नक्षत्र हो तो उसको जयंती के नाम से कहा जाता है उसमें प्रयत्न से उपवास करना चाहिए।

 विष्णु रहस्य में भी कहा गया है कि कृष्ण पक्ष अष्टमी में रोहिणी नक्षत्र युक्त भाद्रपद मास में हो तो जयंती नाम वाली कही गई है।

 ज्योतिष के विद्वानों ने भी रोहिणी योग अर्धरात्रि में उत्तम , अर्ध रात्रि  के बाद रोहिणी योग मध्यम, और दिन के आदि में रोहिणी नक्षत्र अधम कहा गया है।
 वशिष्ट संहीता में वर्णन है कि यदि अष्टमी तथा रोहिणी इन दोनों का योग अर्धरात्रि में अंश पूर्ण भी हो तो मुहूर्त मात्र में भी यह योग से उसी दिन को ही मान लेना चाहिए।

 विष्णुधर्मोत्तरा पुराण में भी कहा गया है यह योग आधी रात के बाद रोहिणी उदय होने पर शुद्ध आत्मा  स्नान कर यदि उसी दिन अगर उदय कालीन में अष्टमी हो तो भी उसी दिन को व्रत पालन कर लेना चाहिए ।

निर्णय सिंधु में एक और वाक्य कहा है कि जब पूर्व दिन या पर दिन रोहिणी नक्षत्र योग हो और अष्टमी का सहयोग हो तो उसी दिन भगवान श्री कृष्ण का जन्म उत्सव पालन करना चाहिए।

 इसी बात को माधव ने भी यही कहा है कि जिस वर्ष में जयंती का योग जन्माष्टमी में हो तो जयंती में अन्तर्भूत नक्षत्र योग की प्रशंसा जानना चाहिए।

 मदन रत्न, निर्णयामृत, गौड़ और मैथिली मत भी यही है । 

हिमाद्रि में वर्णन है कि रोहिणी  युक्त उपष्य (उपवास के तुल्य) सब पाप को नाश करने वाली है। यदि आधीरात के पूर्व हो या बाद हो एक कला से भी रोहिणी सहयोग हो तो उस दिन जन्माष्टमी व्रत अत्यंत शुभ है।

 अग्नि पुराण के अनुसार आधी रात में रोहिणी का योग अंश मात्र भी हो आधी रात्रि में ना हो परंतु चंद्रमा से ही रोहिणी नक्षत्र का योग हो तो उसी दिन ही जन्माष्टमी व्रत पालन करना  यह उत्तम है।

 विष्णुधर्मोत्तरा पुराण में भी कहा गया है आधी रात के समय में रोहिणी में जब कृष्णाष्टमी हो तो उसमें कृष्ण अर्चन पूजन करने से अनेक पापों को नष्ट हो जाता है।

 हम श्री कृष्ण जन्म का पालन करते समय कुछ अन्य बात भी ध्यान रखना चाहिए कि अगर दिन में अष्टमी हो और रात्रि के अंत में रोहिनियुक्त हो तो यह जयंती के लिए विशेष शास्त्र मत है।

 ब्रह्मांड पुराण में कहा गया है अभिजीत नामवाला नक्षत्र था जयंती नामवाली रात्रि विजय नाम का मुहूर्त होता है इसी में भगवान श्रीकृष्ण जनार्दन अवतरित हुए हैं। तो दिन में या रात में कला मात्र भी रोहिणी का योग हो अष्टमी संयोग हो बुधवार का दिन हो तो यह जन्म उत्सव के लिए सबसे ग्राहय् है । इसमें रोहिणी का योग आधी रात में भी ही  तो व्रत महोत्सव के लिए उत्तम है। इन सभी पुराण मत के अनुसार इस वर्ष भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म उत्सव 12 अगस्त को मनाया जाए क्योंकि 12 अगस्त को बुधवार भी है उदया तिथि में अष्टमी है रोहिणी नक्षत्र रात्रि में स्पर्श कर रही है और इसी दिन भाद्रपद कृष्ण अष्टमी भी है इस सूत्र के अनुसार 12 तारीख को भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म उत्सव व्रत है बड़े आनंद से हर्ष उल्लास से व्रत महोत्सव मनाएं।
*नूतन 
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एक भजन
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 "मैया नंद लाल तेरो बिगड़ गयो री , मेरी मटकी को माखन सबड गयो री ,1, कल रात चुपके से घर मेरे आया ,चोरी से जुल्मी ने माखन चुराया ,हाथ पकडयो तो बैरी झटक गयो री ,मेरी '''२ मैने कहा चोरी से माखन क्यों खाए ,मांगे से दे दूंगी जितना तू चाहे , नाक चोखट पे मेरी रगड़ गयो री ,मेरी ,,,3 गुस्से में मैने मा मोहन को डाटा ,घर में क्या है तेरे माखन का घाटा ,बात सुन के वो मेरी अकड़ गयो री मेरी ,,,,4 गुजरी न इतरा तु माखन पे तेरे , नदियां बहे घर में मैया के मेरे ,वो तो फोकट में मो से झगड़ गयो री ,मेरी मटकी को """"" कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में भजन ,,,

* प्रस्तुतकर्ता "साधना श्रीवास्तव "
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 हायकु
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जागृत रहो,
     न डरो संघर्षों से,
        होंगे सफल।

निंदा न करो,
  करो गुण ग्रहण,
  गुणवान हो।

जीने की आशा,
  जागृत हो दिल में,
   निराश न हो।

मन विकार,
 दूर करो मन से,
   हो शुद्ध भाव।

जितना चाहो,
 जो चाहो जब चाहो,
   क्या कभी मिला।

इर्ष्या द्वेष,
  परिणाम बिगड़े,
  छोड़ना ठीक।

विचार करे,
 क्या खोया क्या पाया,
   सोच जरूरी।,

जिंदादिली ही,
 खुश होने का राज,
       कला जीने की,,,,,,,,,,,
                
            *   स्वरचित नवनीत जैन
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कृष्ण नगरी 
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 तेरी नगरी तो बहुत दूर है कान्हा
कैसे आऊ तेरी नगरी
न मथुरा आ सकती
न गोकुल 
ये कोरोना वायरस बिच में आगया 
न अकेली आ सकती 
न सखी साथ आ सकती ये कोरोना मोये डराय
पर तू तो आ सकता है ना कान्हा 
वृंदा वन में बेठा बैठा मुस्करा रहा
हमको किस के भरोसे छोडा कान्हा ये तो बता दे।
नजरो से गिराना ना
चाहे जितनी सजा देदे। 
ऐसी क्या गल्ती हम से होगई  
जो हमारी सुधी नही लेरहा। 
सुनते हे तेरी रहमत दिन रात बरसती है। 
अब तो बहुत हो गया कान्हा 
हम पर भी तेरी रहमत बरसा दे। 
तु ही कहता है ना  जब जब
धरती पर पाप बडेगा में जन्म लूगा।
 तो आकर हमको मांफ कर
और पापियों के साथ इस पापी 
कोरोना को भी मार। 
तेरे छोटे-छोटे बच्चे पिंजरे में रह कर घबरा गये। 
कल तू आरहा हे ना कान्हा 
तो धरती पर जन्म लेकर आ
और हमे इस डरावने संकट से मुक्त कर। 
कल हम तेरा इसी आस से
तेरे आने का इंतजार करेगे। 
हमारे प्राणों के आधार 
कान्हा आजा  एक बार 
हमें दर्शन दो साकार 
हरि आजा एक बार। 
तेरी भक्त 
              * प्रभा तिवारी
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जय श्री कृष्ण
______

श्रीकृष्ण तो बड़ा ही छलिया।
 ढूंढें राधा को बगिया -बगिया।
 नंदबाबा का वो राज  दुलारा।
 यशोदा का सुत   प्राण-प्यारा।

 बलराम है जिनके बड़े भैया ।
ग्वाले संग चरावे है  जो गैया ।
पार लगा  दो  हमारी भी नैया। 
नहीं   है कोई  हमारा खिवैया।

द्रौपदी की आपने लाज बचाई ।
पांडवों को भी तो जीत दिलाई। 
आते क्यों नहीं तुम इस डगरिया।
सूनी पड़ी है  हमारी ये नगरिया।

 कोरोना  नाग है  रे कालिया ।
डस लिया इसने विश्व को भैया। 
लगा दो एक हुँकार सांवरिया। 
प्रार्थना करती हूँ ओढ़ चुनरिया।

*मीना जैन दुष्यंत  भोपाल( स्वरचित)
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*कलयुग के वचन*
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मैं  तो  लेती  वचन   पिया   से
प्रियवर  तुमको  आना   होगा।
इक जनम नहीं ,सातों  जन्मों
पति  का धर्म  निभाना  होगा।


कलयुग  में  हैं  रात अमावस
चांदनी   रातें   नहीं    होती।
एक  नहीं,‌  हैं  सहस्रों  राक्षस
मैं  गहरी   नींद   नहीं   सोती।
रावण   डालें‌   बुरी   नजरिया 
रघुवर सबक सिखाना होगा।

इक जनम नहीं सातों  जन्मों
पति  का धर्म  निभाना  होगा।।

 है   द्रोपदी   जीवन  में  पिया
 सौतन  कभी  नहीं   लाओगे।
निरे   दुशासन  भरे  धरा   पर
दाओ  पर   नहीं   लगाओगे ।
चीर -हरण  देखो  जो अर्जुन
गांडिव  तुम्हें   उठाना  होगा।

इक  जनम नहीं  सातों जन्मों
पति  का धर्म  निभाना  होगा।।

मुश्किल  में कहीं  रात बितालूं
पिया मन  मेला न  कर  लेना।
नियति  खेले  खेल  कोई   तो
तुम गांठ न मन में  धर   लेना।
गर विश्वास तनिक हो मुझ पर  
बिन  परीक्षा  अपनाना  होगा।

इक जनम नहीं सातों  जन्मों
पति  का धर्म   निभाना  होगा।।

अंजाने  में   हो  जो   गलती
प्राणाधार   हाथ   उठाना   न।
देख   सुरा   सी   स्वप्न   सुंदरी
तन-मन भी  तनिक डिगाना न ।
रुक्मण  भी  मैं , राधा  भी   मैं
मुझपर   प्रेम   लुटाना   होगा।

इक  जनम नहीं  सातों जन्मों
पति  का धर्म  निभाना  होगा।।

*सीमा शिवहरे "सुमन"*
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जन्माष्टमी पर मेरी धनुष वर्ण पिरामिड रचना
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ऐ 
काले
किसना
बंशीधर
मनमोहन
घुंघराले केश
गले बिराजे माला
मौर मुकुट वाला
कानों में ‌मुरकी
तिलक धारी
चतुर्भुज
मोहन
मेरा 
तू
हे 
मन
चंचल
चितवन
तिरछे नैन
मुरलीबजैया
जन्माष्टमी पर
पधारिए अंगना
शीतल हो नयन
उतारू आरती
निहारूं तुझे
पालनहार
चितचोर
माधव
आओ
ना

      स्वरचित
*सुश्री हेमलता शर्मा 'भोली बैन' राजेंद्र नगर इंदौर मध्य प्रदेश
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साथ तुम्हारे...

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जन्माष्टमी मना रहे हैं।
छप्पन भोग लगा रहे हैं।
पुष्पमालाओं और दीयों से
मंदिर-मंदिर सजा रहे हैं।


महँगे वस्त्राभूषणों से , 
सुंदर मूर्ति सजा रहे हैं।
माखन-मिश्री का भोग लगाकर,
भक्तों को लड्डु चखा रहे हैं।


कोई बने गोपाल कृष्ण
कोई राधे का भेस धरे।
ग्वाल-बाल और नंद यशोदा,
झाँकी की शोभा बढ़ा रहे हैं।

मेरा मन न रमता कान्हा,
मथुरा या वृंदावन में।
मैं तो हूँ बस साथ तुम्हारे,
नयन अश्रु-जल बहा रहे हैं।


घने पेड़ के नीचे सोये,
जाने किस विचार में खोये।
नील वर्ण का चरण है घायल,
रक्त-बिंदु तृण भिगा रहे हैं।


विष बुझा इक बाण लगा है,
व्याध खड़ा है, काँप रहा है।
लता-विटप-वन प्रांतर सारा
नदी,निर्झर आँसू बहा रहे हैं।
जन्माष्टमी....
स्व रचित-
*अरुणा खरगोनकर
इंदौर.
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                 कृष्णा
              (कर्म ग्रहण)
                 _______

नये घर में मैंने अपना ब्युटीपार्लर भी खोला था थोड़े ही दिनों में चल पड़ा मेरा स्वभाव बचपन से ही मैत्री पुर्ण रहा इसलिए सभी से अच्छे संबंध रहे, कुछ ही दिनों में हमारे चार घर छोड़ कर सिसौदिया परीवार भी अपने नये घर में शिफ्ट हो गया,मेरे बेटे अर्जुन की गेंद खेलते-खेलते उनके आंगन में चली गई वहीं लेने में उनके यहां गयी,अंकल आंगन में ही बैठे हुए थे और उनकी गोद में लगभग ७-८ महीने का सांवला सलोना, तीखे नैन-नक्श वाला शरीर से हष्ट-पुष्ट प्यारा सा बच्चा बैठा हुआ था, मैं जैसे ही अंदर पहुंची उन्होंने नमस्कार किया और आंटी को आवाज लगाई
"सुनती हो कृष्णा को जरा झुले में डाल दो ,और हां चाय चढ़ा दो नंदा जी आई है"आंटी बाहर आते हुए बोली"आप ही डाल दो ऐसी काली कलुटि लड़की को झुले में,पता नहीं विपिन इसे इसकी नानी के यहां से क्यो ले आया ? वहीं पलने देता,नमस्ते नंदा बेटी आओ बैठो, देखो न मैंने तो सोचा था जन्माष्टमी का दिन है तो लड़का ही होगा और हुई ये ,नाम कृष्णा रखने से सच्चाई तो नहीं बदल जाएगी रहेगी तो यह लड़की ही, में उनकी इस पुरानी विचार धारा पर मुक बनी रही, उनकी बहू उसे अंदर ले जाने लगी तभी कृष्णा टुकुर-टुकुर मुझे देखने लगी मैंने उसे गोद में लेने कि इच्छा जताई वह झट से मेरे पास आ गई और जल्द ही मुझसे घुल-मिल गयी, धीरे-धीरे कृष्णा बड़ी होने लगी,इसी बीच उसका भाई भी हो गया जाहिर है सारा प्यार उसे ही मिलने लगा,माता पिता को भी उससे कोई विशेष लगाव नहीं था बस उसकी जरूरतों कि  पुर्ति हो रही थी,पर सिसौदिया अंकल कृष्णा का पुरा ध्यान रखते, वह पढ़ाई-लिखाई के साथ ही खेलकूद में भी अव्वल थी,घर में उसके पढ़ने लिखने पर ध्यान नहीं दिया जाता तो वह मेरे पास आ जाती, मैं उसे और अपने बच्चों को साथ में पढ़ा दिया करती,शालेय कार्यक्रमों में भी उसे हमेशा कृष्ण हि बनाया गया और तारिफ कि हकदार रहीं ,अपने रंग को लेकर हरबार ताने सुनकर भी उसने कभी बुरा नहीं माना,एकबार जन्माष्टमी पर मटकी फोड़ का आयोजन हुआ बहुत से नौजवानों ने मटकी तक पहुंचने की कोशिश करी पर असफलता ही हाथ लगी तभी कृष्णा वहां पहुंची और कमर कस कर उपर चढ़ने लगी और मटकी फोड़ में सफल रही सबने उसकी तारीफ करी पर आंटी और उसकी मां ने उसे खूब डांटा फटकारा की लड़कियों को यह काम शोभा नहीं देता उस दिन वह बहुत रोई, अंकल ने उसे बहुत समझाया तब वह शांत हुई, अंकल ने उसे चुपके-चुपके कराटे कोर्स भी करवा दिया, दादी के उसुलो के कारण घर के कामों में भी निपुण थी, उसकी उम्र अब पार्लर आने लायक हो गई थी वह जब भी पार्लर आती पीछे से उसकी मां आकर जरूर कहती"नंदा भाभी इसका थोड़ा रंग निखार दो नहीं तो रिश्ता करने में बहुत अड़चनें होगी "मैं उनसे कहती, भाभी हमारी कृष्णा सांवली है तो क्या कितनी सुंदर है इसे तो एक ही नजर में कोई भी पसंद कर लेगा आप चिंता मत करो,एक बार उसने कालेज के बाहर छेड़खानी करने वाले लड़कों को धुल चटा दी थी,उसने पुरी बात मुझे बताई तो मुझे उस पर गर्व हुआ तभी उसे मैंने सिविल सर्विसेस की परीक्षा देने के लिए प्रेरित किया ,मेरा बेटा IPS officer था तो नोट्स वगैरह उसे आसानी से मिल गये,एक दिन दौड़ते हुए वह मेरे पास आई और गले लग गई बोली thankyou आंटी आज आपके और दादू के कारण मैंने सिविल सर्विसेस की परीक्षा पास कर ली है और अच्छे नंबर की वजह से अब DSP के पद पर मेरा चयन हुआ है,परसों ही लखनऊ जाना है, मैंने उसे ढेरो आशिर्वाद दिये, दुसरे दिन आंटी ने मुझे फोन किया और घर आने को कहा makeup box के साथ, उनके यहां गयी तो अजीब सी शांति छाई हुई थी,अंकल सर पकड़ कर बैठे थे, पता चला कृष्णा को देखने लड़के वाले आ रहे हैं आंटी ने कहा"नंदा बेटी इसे अच्छे से तैयार कर दे बड़ी मुश्किल से अच्छा घर हाथ लगा है बस जरा इसके रंग के कारण लेन-देन ज्यादा कर रहे हैं कर लेंगे पर ये बोझ तो उतरे पर देखो महारानी कह रही हे ऐसे दहेज लेने वालो के यहां शादी नहीं करूंगी कह रही है पुलिस कि नौकरी करेगी,अरे हमें नहीं करवाना ये लड़कों वाले काम अब तुम्हीं समझाओं, कृष्णा के माता-पिता बाकी तैयारी में जुटे हुए थे, मैं उसके कमरे में पहुंची तो वह उदास बैठी थी, मैंने पूछा" क्या सोचा है?
ज़वाब मिला "कुछ भी हो जाए दहेज लेने वालो के यहां शादी नहीं करूंगी"मैंने गर्व से उसे देखा और तैयार किया dull pink लेस वाली साड़ी में वह बहुत सुंदर लग रही थी आज  उसके चेहरे पर भी एक अलग ही तेज था, तभी अर्जुन का msg.आया जिसे पढ़कर मैं गदगद हो गई और कृष्णा को लेकर बाहर आई और मैंने अपना निर्णय सुनाया"आंटी आपको अब कृष्णा कि चिंता करने कि कोई जरुरत नहीं है,मेरे बेटे अर्जुन ने इसे अपना जीवन साथी बनाने की मुझसे अनुमति मांगी है,मुझे गर्व होगा कृष्णा को बहू के रूप में पाकर, मेरी बेटी कि कमी पूरी हो जाएगी, कृष्णा ने नाम से ही नहीं कर्मो में भी श्रीकृष्ण के सद्गगुणो को ग्रहण किया है फिर वह लड़का हो या लड़की क्या फर्क पड़ता है कर्म तो सच्चा है ,सिसौदिया अंकल की आंखें डबडबा गई और उनके मुंह से निकला"आज हमारी कृष्णा का सच्चाजन्म हुआ है बेटा और वह अब अपने सच्चे नंदधाम जाएगी"राधे कृष्ण राधे कृष्ण

*स्वरचित
स्वाति वाड़गे (वनकर)
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रिश्ते
____

*रिश्ते बरकरार रखने की*
*सिर्फ एक ही शर्त है* 
*किसी की कमियां नही* 
*अच्छाइयां देखे*
*आप अकेले बोल तो सकते है*
*परन्तु बातचीत नहीं कर सकते*
*आप अकेले आनन्दित हो सकते है*
*परन्तु उत्सव नहीं मना सकते*
*अकेले आप मुस्करातो सकते है*
*परन्तु हर्षोल्लास नहीं मना सकते*
*हम सब एक दूसरेके बिना कुछ नहीं हैं*
*यही रिश्तों की खूबसूरती है*
*खामोशियां बोल देती है*
*ज़िनकी बातें नहीं होती*
*दोस्ती उनकी भी क़ायम है*
*ज़िनकी मुलाक़ातें नहीं होती*

*हरजीत  मीत
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जय श्री कृष्ण
_______
द्वापर युग में में जन्मे श्री कृष्ण ,
आओ हम उनका जन्मदिन मनाते हैं।
कैसे जिया जाता है ये जीवन,
अपने जीवन से वो हमको ये सिखलाते हैं।
राधा, गोप -गोपियों ,नंद- जसोदा संग,
प्यार भरा ,नटखट जीवन गुजारा।
प्रेम किया संपूर्ण सृष्टि से, पशु- पक्षी हो या,
 पर्वत गोवर्धन और जमुना जल की धारा,
सुख भरा संसार था, चारों तरफ से मिला प्यार था,
राधा सी प्यारी सखी थी ,जिस में बसता था मन,
किंतु कर्तव्य सर्वोपरि, कठिन मार्ग पर बढ़ाया कदम,
त्याग मोह को ,छोड़ा बंसीवट ,छोड़ दिया वृंदावन।
दुष्टों का नाश किया,  अन्याय का किया प्रतिकार,
स्त्रीजाति को सम्मान दिलाया ,सज्जनों का किया उपकार ।
दुखों का उन्मूलन किया , बनाया फिर से सुखद संसार,
अधर्म का नाश हुआ, धर्म की हुई फिर जय-जय कार ।
सिखाया उन्होंने कैसे छोड़ बांसुरी, सुदर्शन उठाते हैं,
छोड़ कदम के कुंजों को, कैसे कुरुक्षेत्र में डट जाते हैं।
उनके प्रेरक जीवन को, आओ फिर हम दोहराते हैं,
द्वापर युग में जन्मे श्री कृष्ण
आओ फिर हम उनका जन्मदिन मनाते हैं।
कैसे जिया जाता है ,ये जीवन,
अपने जीवन से वो हमको यह सिखलाते हैं।

 *रेखा  पंचोली 
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बुन्देली नवगीत :
________________
जुमले रोज उछालें 
____
*
संसद-पनघट 
जा नेताजू 
जुमले रोज उछालें। 
*
खेलें छिपा-छिबौउअल,
ठोंके ताल, 
लड़ाएं पंजा।
खिसिया बाल नोंच रए,
कर दओ 
एक-दूजे खों गंजा। 
खुदा डर रओ रे!
नंगन सें 
मिल खें बेंच नें डालें। 
संसद-पनघट 
जा नेताजू 
जुमले रोज उछालें। 
*
लड़ें नई,मैनेज करत,
छल-बल सें 
मुए चुनाव। 
नूर कुस्ती करें, 
बढ़ा लें भत्ते,
खेले दाँव। 
दाई भरोसे 
मोंड़ा-मोंडी 
कूकुर आप सम्हालें।  
संसद-पनघट 
जा नेताजू 
जुमले रोज उछालें। 
*
बेंच सिया-सत, 
करें सिया-सत। 
भैंस बरा पे चढ़ गई। 
बिसर पहाड़े, 
अद्धा-पौना 
पीढ़ी टेबल पढ़ रई।   
लाज तिजोरी 
फेंक नंगई 
खाली टेंट खंगालें। 
संसद-पनघट 
जा नेताजू 
जुमले रोज उछालें। 
*
भारत माँ की
जय कैबे मां 
मारी जा रई नानी। 
आँख कें आँधर
तकें पड़ोसन 
तज घरबारी स्यानी। 
अधरतिया मदहोस 
निगाहें मैली 
इत-उत-डालें। 
संसद-पनघट 
जा नेताजू 
जुमले रोज उछालें। 
*
पाँव परत ते 
अंगरेजन खें,
बाढ़ रईं अब मूँछें। 
पाँच अंगुरिया 
घी में तर  
सर हाथ 
फेर रए छूँछे। 
बचा राखियो 
नेम-धरम खों 
बेंच नें 
स्वार्थ भुना लें। 
***
*संजीव वर्मा  सलिल 
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आस
___
आस कोई जगाते चलो
पाँव आगे  बढ़ाते  चलो 

दूर होंगे सभी  के  गिले 
भाव ऐसे  बनाते  चलो 

जा रहे हो अगर हाट में
मुख अभी तो छुपाते चलो

कौन सोया जहाँ में अभी
नींद सबकी उड़ाते चलो

छूट ना जाये अपने कहीं
लाड़ सबसे लड़ाते चलो

ना गया हाथ से मामला
पाठ सबको पढ़ाते चलो

टूट ना जाय सपने कभी
ख्वाब ऐसे सजाते चलो

देख लो गर 'परिंदा' कहीं
प्रेम उससे जताते चलो ।।

राम शर्मा परिंदा
मनावर जिला धार मप्र

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बंसी  धूंन 
_______
 
बंसी की धुन सुन नाचे ग्वाल गोपियाँ 
कान्हा ने जनम लिया मनाओ आज खुशियां ,
दधि नवनीत छाँछ से स्नेह सिक्त होकर 
मन की गाँठ खोल सब तोड़ों ये मटकियाँ ।।
कंस के फनों पर रास करने वाले अतुल्य कान्हा के जन्म दिवस के अवसर पर आप सभी को मिश्री भरी शुभकामनायें 

* डॉ करुणा पांडे 🙏🙏🙏🙏
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भीगा  समा 
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मुरली मधुर बजा जा
भीगा ॒भीगा है समां ऐसे में तुम कहां 
 मेरे कृष्ण कन्हैया आ जा ं मुरली मधुर बजा जा।
 सावन की बहारें आईं हैं ं हर फूल ॒कली मुस्काई है
 मुरली मधुर बजा जा ।
  बागों में पड़ गए हैं झूले ं आ हिल-मिलकर झूलें
 आकर झूला झुला जा।
 ठंडी-ठंडी पवन चले है ं आकाश में बिजुरी चमके है
 बूंदों का त्योहार मना जा।
 कब से बाट देख रहे ं नैना रास्ता निहार रहे
 आकर दर्शन दिखा जा।
 तुम बिना सूना सारा चमन ं दिल को लगी तेरी लगन
 मन की प्यास बुझा जा।
 * नीति अग्निहोत्री
५७ साईं विहार इन्दौर म प्र
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 जन्माष्टमी*
विधा : गीत
______&__

कितना पवन दिन आया है।
सबके मन को बहुत भाया है।
कंस का अंत करने वाले ने,
आज जन्म जो लिया है।
जिसको कहते है जन्माष्टमी।।

काली अंधेरी रात में नारायण लेते।
देवकी की कोक से जन्म।
जिन्हें प्यार से कहते है।
कान्हा कन्हैया श्याम कृष्ण हम।।

लिया जन्म काली राती में, 
तब बदल गई धरा।
और बैठा दिया मृत्युभय,
कंस के दिल दिमाग में।
भागा भागा आया जेल में,
पर ढूढ़ न पाया बालक को।
रचा खेल नारायण ने ऐसा, 
जिसको भेद न पाया कंस।।

फिर लीलाएं कुछ ऐसी खेली।
मंथमुक्त हुए गोकुल के वासी।
माता यशोदा आगे पीछे भागे।
नंदजी देखे तमाशा मां बेटा का।।

सारे गांव को करते परेशान, 
फिर भी सबके मन भाते है।
गोपियाँ ग्वाले और क्या गाये, 
बन्सी की धुन पर थिरकते है।
और मौज मस्ती करके, 
लीलाएं वो दिख लाते है।
और कंस मामा को,
सपने में बहुत सताते है।।

प्रेम भाव दिल में रखते थे,
तभी तो राधा से मिल पाए।
नन्द यशोदा भी राधा को, 
पसंद बहुत किया करते थे।
गोकुल वासियों को भी,
राधा कृष्ण बहुत भाते थे।
और प्रेमी युगलों को भी,
कृष्ण राधा का प्यार भाता है।।

सभी पाठको के लिए जन्माष्टमी
की शुभ कामनाएं और बधाई।

*जय जिनेन्द्रा देव की
संजय जैन (मुम्बई)
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: श्री कृष्णा
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अखंड अनंत ब्रम्हाण्ड
के शाश्वत रचयिता
कण कण में विराजित
सर्वव्यापी नायक
जिसकी लीलायें
मानव अंश में व्याप्त
होकर जन जन प्रसारित
श्री कृष्ण की लीलाये
वे अनंत योगी अंतर्यामी
निष्काम कर्मयोगी
जिनकी लीलाये है
अपरंपार जन के नायक
समाजवादी दोस्ती का
निर्भभयन करने वाले एक 
अच्छे सखे असंख्य ह्रदये
में बसे श्री कृष्णा 
एक योद्धा एक नितीयक
एक कुटनीतियाग एक भाई
अनंत नामो से सुशोभित
प्रेम की अप्रतिम प्रतीति
अनंत प्रेम सद्भाव के प्राणेता
उनके जन्म दिवस पर हार्दिक
बधाई हो समस्त प्राणियों को
*शिव कुमार दुबे इंदौर
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कान्हा  आओ 
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ओ कान्हा ,आओ ना 
टेर लगाते ,सुन जाओ ना 
तुमने ही तो कहा था 
जब-जब मेरी जरूरत होगी 
मैं धरती पर आऊँगा
तेरे कष्ट सब मिटाउँगा
मुसीबत में है भारतवासी 
कोरोना विपदा आई अच्छी खासी 
देर मत लगाओ ,आ जाओ 
संकट से कान्हा हमें बचाओ 
आताताई कंस को तुमने मारा 
गीता का ज्ञान देकर सबको तारा 
अब हमको भी तारो ना 
महामारी से छुटकार दो ना 
गाएंगे तुम्हारी आरती 
सजाएँगे तुम्हारी झांकी
हाथी घोड़ा पालकी 
जय कन्हैया लाल की


*उषा गुप्ता
इंदौर

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माखनचोर 
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माखन चुरा कर खाए कन्हैया बंसी की धुन पर नाच नचाए कन्हैया🙏🌹ग्वाल गोपी दौड़ी दौड़ी आए,,, मधुर धुन सबके मन को लुभाए🌷🌷

रूप तेरा सलोना प्यारा है,,, मंत्रमुग्ध मोर पाखी निराला है💐💐 पूजती जिन्हें दुनिया सारी हरे कृष्ण हरे मुरारी🌷

खुशियां मनाओ जन्मदिन की,,, जिसने प्रेम का रास्ता दिखाया🌹 वसुधा को दुखों से मिटाया,,, बड़े-बड़े राक्षसों को मार भगाया🌹🌹

मुरली मनोहर जमुना तट पर विराजे🌷 कानन कुंडल मुरली साजे 🌷मोरपंखी माथे बिराजे🌷 पूजतीहै दुनिया सारी,,,, ऐसे कान्हा के गुण गाजे🙏

सोलह
 कलाओं में प्रवीण है योगीराज श्री कृष्ण निपुण है💐 राधा रानी के सरताज हैं,,, ऐसे कन्हैया का जन्म आज है💐

बोलो श्री कृष्ण कन्हैया लाल की जय🌹

*सुषमा शुक्ला इंदौर

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:कृष्ण जन्म 
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विधा कविता 
___

बृज मे बटत बधाई 
जन्मे कुअँर कन्हाई ।
आधी रात घनी बरसात,
जमुना थी उफनाई ,
जन्मे कुअँर कन्हाई ।
कारागृह के बंद द्वार
बिन चाबी ताले खुल गये
अदभुद लीला रचाई ।
जहाँ जन्म लिया वहां 
पिया दूध नहीं ,
जहां दूध पिया वहां 
लिया जन्म नहीं ,
दो दो माता ने खुशियां
मनाई ।
जन्मे कुअँर कन्हाई ।
कंस मामा का करने सफाया ,
रची काना ने ये ऐसी माया ,
धन धन प्रभु की चतुराई 
शोभा बरनी न जाई ,
अदभुत लीला रचाई ।

  *मनोरमा जोशी 
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" कृष्ण के रूप"  
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 नटखट चितचोर माखन चोरअनेक रूप
भिन्न रूपो में प्रकट हुआ स्वरूप🌹

बचपन में माखन चुरा बने  माखन चोर 
गोपियों के संग रास रचा बने चित्र चोर। 🌹

अल्हड़ रूप बन नटखट कहलाये 
यशोदा के प्यारे कान्हा कहलाए। 🌹

शेषनाग को अपना छत्र बना सबको  लुभाया 
बलराम को भाई बना उन्हें रिझाया। 🌹

अर्जुन को सखा मान  मित्रता खूब निभाई 
द्रौपदी की लाज बचा नारी की लाज बचाइ। 🌹

पांडवों को अधर्म पर लड़ने को उकसाया 
अपने ही परिजनों को अधर्म का  पाठ पढ़ाया।🌹

महाभारत में अर्जुन के सारथी बने 
अधर्म के खिलाफ लड़ने के साक्षी बने। 🌹

भारत को एक बना अमर कर दिया 
कृष्ण के रूपों को साकार किया। 🌹

        *प्रेरणा सेन्द्रे (इंदौर )

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       बेमेल शब्द 
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शब्दों के साथ हुए 
तो ये आगे -आगे चलकर बियाबान जंगल हो गये 
रोशनी बनाना चाहा 
तो धुएँ की चादर बनकर छा गये  सर्वत्र 
तानना चाहा छातों- सा 
तो बादलों की पर्त बनकर पूरा आकाश ही निगल गये 
शीतल बयार बनाना चाहा 
तो लू के झोंके हो गये 
जब आवाजें लगाई दोस्तों को 
तो ये उनके कानों में चिपक गये 
अर्थ और अभिव्यक्ति की जंजीरें लिए 
आदमी को ठाट से गुलाम बनाने 
सदैव ही -
तत्पर हैं  बेमेल शब्द। 
(श्री प्रेमशंकर  रघुवंशी जी के कविता संग्रह "पकी फसल के बीच "से उद्धृत)

*विनीता  रघुवंशी 
========
 *नटखट कान्हा
______________

चलन लागे मोहन ठाड़े ह्वै
पल में बाहर पल में भीतर
जसुमति पाछे धावै
जो पावैं धरती पर पटकैं
मोहन मोद मनावैं
काली बजा बजा कर हुलसत
झटपट बरतन फेंकें
रोकत मैया करकमल गहि
नन्दबाबा  भी  रोकैं
रोकटोक सों रूठे कान्हा
रोवत मुख फैलाय
ततछन मुख महिं धर्यो माखन
जसुमति लीन्हि मनाय
बड़े भाग तेरे जसुमति जो
पाई लीला न्यारी
आभा कहै निरख यह लीला 
जाऊँ मैं बलिहारी
      
       *डॉ. आभा माथुर*
         सेवा निवृत्त प्राचार्य 
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 7  🌹 कब आओगे 🌹
__________

 हे मधुसूदन माधव मनोहारी नंदलाल,
   कसक ये रूहानी कब मिटाओगे ,,,?
हे कृष्ण कहो कब आओगे,,,,,,,,,?
उदास मन निकुंज की यह गलियां सारी ,
मृदुल मुरली की तान कब लगाओगे ,,?
 हे कृष्ण कहो कब आओगे,,,,,,,?
 सूना सूना यमुना तट का उपवन,
 कह रही गोपिया संग राधा रास रचाओगे
हे कृष्ण कहो कब आओगे,,,,,,
मनमोहक चितचोर अनोखी छवि तुम्हारी,
छाई जीवन में उदासी हरने कब आओगे,?
हे कृष्ण कहो कब आओगे ,,,,,,,?
प्रेम दीवानी मीरा का इकतारा पुकारे,,, 
बोल रही राधा की मखमली  प्रीत,
 हे कृष्ण कहो कब आओगे,,,,,,,,?
रुकमणी हृदय कमल करे सोलह श्रृंगार,
मधु प्रेम विरहन के चित उपवन की चाह, 
हे कृष्ण कहो कब आओगे,,,,,,,?
       🌹 मधु वैष्णव 


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