Nutan जी, lions:
*जन्माष्टमी व्रत कब मनाया जाए*
यह व्रत भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को किया जाता है। भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी बुधवार को रोहिणी नक्षत्र में अर्धरात्रि के समय में वृष के चंद्रमा में हुआ था अतः अधिकांश उपासक उक्त बातों में अपने अपने अभीष्ट युग का ग्रहण करते हैं । परंतु शास्त्र में इसका दो भेद है एक है सुद्धा और विद्धा। सुद्धा मतलब यह है कि उदय से उदय पर्यंत अष्टमी हो तो सूद्धा कहलाता है। और सप्तमी या नवमी युक्ता अष्टमी हो तो विद्धा कहा जाता है। समान समान और न्यून अधिक भेद से तीन प्रकार है। यदि परंतु सिद्धांत रूप में तत्काल व्यापिनी अर्धरात्रि में रहने वाले तिथि को ही अधिक मान्य होती है। वह यदि 2 दिन का हो या दोनों ही दिन में ना हो तो सप्तमी विद्धा को सर्वथा त्याग कर नवमी विद्धा को ग्रहण करना चाहिए।
हमारे अनेक अनेक पुराणों में भी इसका वर्णन है।
माधव का मत है कि अष्टमी दो प्रकार की है पहले जन्माष्टमी और दूसरी जयंती इसमें पहले केवल अष्टमी को ही माना गया है।
स्कंद पुराण में भी यही बात कही गई है
निर्णय सिंधु में कहा गया है कि यदि दिन या रात में कला मात्र में भी रोहिणी हो तो विशेषकर चंद्रमा से मिली हुई रात्रि को मान लेना चाहिए।
भविष्य पुराण में कहा गया है कि भाद्रपद मास के कृष्ण जन्माष्टमी व्रत को कहा गया है। केवल जन्माष्टमी में ही उपवास करना है। यदि वह तिथि रोहिणी नक्षत्र युक्त हो तो जयंती नाम से कही जाती है।
बन्ही पुराणों में कहा गया है कृष्ण पक्ष की अष्टमी यदि एक कला भी रोहिणी नक्षत्र हो तो उसको जयंती के नाम से कहा जाता है उसमें प्रयत्न से उपवास करना चाहिए।
विष्णु रहस्य में भी कहा गया है कि कृष्ण पक्ष अष्टमी में रोहिणी नक्षत्र युक्त भाद्रपद मास में हो तो जयंती नाम वाली कही गई है।
ज्योतिष के विद्वानों ने भी रोहिणी योग अर्धरात्रि में उत्तम , अर्ध रात्रि के बाद रोहिणी योग मध्यम, और दिन के आदि में रोहिणी नक्षत्र अधम कहा गया है।
वशिष्ट संहीता में वर्णन है कि यदि अष्टमी तथा रोहिणी इन दोनों का योग अर्धरात्रि में अंश पूर्ण भी हो तो मुहूर्त मात्र में भी यह योग से उसी दिन को ही मान लेना चाहिए।
विष्णुधर्मोत्तरा पुराण में भी कहा गया है यह योग आधी रात के बाद रोहिणी उदय होने पर शुद्ध आत्मा स्नान कर यदि उसी दिन अगर उदय कालीन में अष्टमी हो तो भी उसी दिन को व्रत पालन कर लेना चाहिए ।
निर्णय सिंधु में एक और वाक्य कहा है कि जब पूर्व दिन या पर दिन रोहिणी नक्षत्र योग हो और अष्टमी का सहयोग हो तो उसी दिन भगवान श्री कृष्ण का जन्म उत्सव पालन करना चाहिए।
इसी बात को माधव ने भी यही कहा है कि जिस वर्ष में जयंती का योग जन्माष्टमी में हो तो जयंती में अन्तर्भूत नक्षत्र योग की प्रशंसा जानना चाहिए।
मदन रत्न, निर्णयामृत, गौड़ और मैथिली मत भी यही है ।
हिमाद्रि में वर्णन है कि रोहिणी युक्त उपष्य (उपवास के तुल्य) सब पाप को नाश करने वाली है। यदि आधीरात के पूर्व हो या बाद हो एक कला से भी रोहिणी सहयोग हो तो उस दिन जन्माष्टमी व्रत अत्यंत शुभ है।
अग्नि पुराण के अनुसार आधी रात में रोहिणी का योग अंश मात्र भी हो आधी रात्रि में ना हो परंतु चंद्रमा से ही रोहिणी नक्षत्र का योग हो तो उसी दिन ही जन्माष्टमी व्रत पालन करना यह उत्तम है।
विष्णुधर्मोत्तरा पुराण में भी कहा गया है आधी रात के समय में रोहिणी में जब कृष्णाष्टमी हो तो उसमें कृष्ण अर्चन पूजन करने से अनेक पापों को नष्ट हो जाता है।
हम श्री कृष्ण जन्म का पालन करते समय कुछ अन्य बात भी ध्यान रखना चाहिए कि अगर दिन में अष्टमी हो और रात्रि के अंत में रोहिनियुक्त हो तो यह जयंती के लिए विशेष शास्त्र मत है।
ब्रह्मांड पुराण में कहा गया है अभिजीत नामवाला नक्षत्र था जयंती नामवाली रात्रि विजय नाम का मुहूर्त होता है इसी में भगवान श्रीकृष्ण जनार्दन अवतरित हुए हैं। तो दिन में या रात में कला मात्र भी रोहिणी का योग हो अष्टमी संयोग हो बुधवार का दिन हो तो यह जन्म उत्सव के लिए सबसे ग्राहय् है । इसमें रोहिणी का योग आधी रात में भी ही तो व्रत महोत्सव के लिए उत्तम है। इन सभी पुराण मत के अनुसार इस वर्ष भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म उत्सव 12 अगस्त को मनाया जाए क्योंकि 12 अगस्त को बुधवार भी है उदया तिथि में अष्टमी है रोहिणी नक्षत्र रात्रि में स्पर्श कर रही है और इसी दिन भाद्रपद कृष्ण अष्टमी भी है इस सूत्र के अनुसार 12 तारीख को भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म उत्सव व्रत है बड़े आनंद से हर्ष उल्लास से व्रत महोत्सव मनाएं।
*श्रीमती नूतन जी
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ओहो,,,ओहो,,,ओहो,,,ओहो,,,
गोपाल मेरा पालने में झूले रे,,,
गोपाल मेरा पालने में झूले रे,,,
साँवला, सलोना कान्हूडा मेरा
पालने में झूले रे,,,यशोदा मैया,,लोरी गाये,सुलाएरे,,,,
गोकुल धाम में झूला सज़ा, झुलाए रे गोप गोपियां
हरे भरे पेड़ पर ऊंची लटकाई
दही हंडियां
दही हंडिया टूटते ही,दर्शन कर मन डोल रहा,उस कान्हा में
कुछ पागत है,कुछ झूमत है
आओ ,गाओ,खुशी के गीत
आलकी की पालकी जय कन्हैय्या लाल की🥳🎊🙏🏻
*प्रभा जैन
: एक भजन "मैया नंद लाल तेरो बिगड़ गयो री , मेरी मटकी को माखन सबड गयो री ,1, कल रात चुपके से घर मेरे आया ,चोरी से जुल्मी ने माखन चुराया ,हाथ पकडयो तो बैरी झटक गयो री ,मेरी '''२ मैने कहा चोरी से माखन क्यों खाए ,मांगे से दे दूंगी जितना तू चाहे , नाक चोखट पे मेरी रगड़ गयो री ,मेरी ,,,3 गुस्से में मैने मा मोहन को डाटा ,घर में क्या है तेरे माखन का घाटा ,बात सुन के वो मेरी अकड़ गयो री मेरी ,,,,4 गुजरी न इतरा तु माखन पे तेरे , नदियां बहे घर में मैया के मेरे ,वो तो फोकट में मो से झगड़ गयो री ,मेरी मटकी को """"" कृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में भजन ,,,
*प्रस्तुतकर्ता "साधना श्रीवास्तव
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: *कल-कल छल छल नदिया मुबारक*
भादवी प्रणाम
धूप-छांव मेरे मन के गांव
थिरक रहे हैं मेरे पांव
हम तुम तुम हम छम छम
आओ बैठें प्यार की छांव
रास रचे वनवास रचे
रच दिये मन के भाव
बंशी प्रीत की ऐसी बजी
सब बैठे उसके ठांव!
*लता प्रासर*
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हायकु,
जागृत रहो,
न डरो संघर्षों से,
होंगे सफल।
निंदा न करो,
करो गुण ग्रहण,
गुणवान हो।
जीने की आशा,
जागृत हो दिल में,
निराश न हो।
मन विकार,
दूर करो मन से,
हो शुद्ध भाव।
जितना चाहो,
जो चाहो जब चाहो,
क्या कभी मिला।
इर्ष्या द्वेष,
परिणाम बिगड़े,
छोड़ना ठीक।
विचार करे,
क्या खोया क्या पाया,
सोच जरूरी।,
जिंदादिली ही,
खुश होने का राज,
कला जीने की,,,,,,,,,,,
*स्वरचित नवनीत जैन
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विषय: बाल कृष्ण
विधा :ताँका
मापनी:5,7,5,7,5,7,7
💐💐💐💐💐💐💐
जन्म कल्याण,
प्रभु श्री बाल कृष्ण,
परमानन्द,
मंगल अभिलाषा,
तुज़ दर्शन,
सुखानंद प्रतीति,
पाऊँ परम् शान्ति।
कान्हा जनम,
गाएँ मंगल गीत,
मूर्त सलोनी,
देख यशोदा मैय्या,
लेके बलैय्या,
मन्द मन्द मुस्काई,
बधाई हो बधाई।
मोर मुकुट,
पीताम्बर शोभित,
कान्हा बंसरी,
अधर रख बजाई,
माखन चोर,
भये नन्द किशोर,
राधा रास रचाई।
चंचल मना
नटखट गोपाला,
देख मूरत,
मुझ होवे भावना,
मुखड़ा प्यारा,
देखती रहूँ तेरा,
चिंतन करूँ तेरा।
*स्वरचित:प्रभा जैन इंदौर
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: तेरी नगरी तो बहुत दूर है कान्हा
कैसे आऊ तेरी नगरी
न मथुरा आ सकती
न गोकुल
ये कोरोना वायरस बिच में आगया
न अकेली आ सकती
न सखी साथ आ सकती ये कोरोना मोये डराय
पर तू तो आ सकता है ना कान्हा
वृंदा वन में बेठा बैठा मुस्करा रहा
हमको किस के भरोसे छोडा कान्हा ये तो बता दे।
नजरो से गिराना ना
चाहे जितनी सजा देदे।
ऐसी क्या गल्ती हम से होगई
जो हमारी सुधी नही लेरहा।
सुनते हे तेरी रहमत दिन रात बरसती है।
अब तो बहुत हो गया कान्हा
हम पर भी तेरी रहमत बरसा दे।
तु ही कहता है ना जब जब
धरती पर पाप बडेगा में जन्म लूगा।
तो आकर हमको मांफ कर
और पापियों के साथ इस पापी
कोरोना को भी मार।
तेरे छोटे-छोटे बच्चे पिंजरे में रह कर घबरा गये।
कल तू आरहा हे ना कान्हा
तो धरती पर जन्म लेकर आ
और हमे इस डरावने संकट से मुक्त कर।
कल हम तेरा इसी आस से
तेरे आने का इंतजार करेगे।
हमारे प्राणों के आधार
कान्हा आजा एक बार
हमें दर्शन दो साकार
हरि आजा एक बार।
तेरी भक्त
* प्रभा =======*🌹सफल जीवन 🌹*
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*एक बार अर्जुन ने कृष्ण जी से पूछा-*
*माधव.. 'सफल जीवन' क्या होता है ?*
*कृष्ण जी अर्जुन को पतंग उड़ाने ले गए।*
*अर्जुन कृष्ण जी को ध्यान से पतंग उड़ाते देख रहे थे।*
*थोड़ी देर बाद अर्जुन बोले*
*माधव.. ये धागे की वजह से पतंग अपनी आजादी से और ऊपर की ओर नहीं जा पा रही है, क्या हम इसे तोड़ दें ? ये और ऊपर चली जाएगी !*
*कृष्ण ने धागा तोड़ दिया ..*
*पतंग थोड़ा सा और ऊपर गई और उसके बाद लहरा कर नीचे आयी और दूर अनजान जगह पर जा कर गिर गई...*
*तब कृष्ण जी ने अर्जुन को जीवन का दर्शन समझाया...*
*पार्थ.. 'जिंदगी में हम जिस ऊंचाई पर हैं..*
*हमें अक्सर लगता की कुछ चीजें, जिनसे हम बंधे हैं वे हमें और ऊपर जाने से रोक रही हैं; जैसे :*
*-घर:परिवार-*
*-रिश्ते:नाते-*
*-अनुशासन-*
*-माता-पिता-*
*-गुरू-और-*
*-समाज-*
*और हम उनसे आजाद होना चाहते हैं...*
*वास्तव में यहीं वो धागे होते हैं - जो हमें उस ऊंचाई पर बना के रखते हैं..*
*इन धागों के बिना हम एक बार तो ऊपर जायेंगे परन्तु बाद में हमारा भी वो ही हश्र होगा, जो बिन धागे की पतंग का हुआ...'*
*अतः जीवन में यदि तुम ऊंचाइयों पर बने रहना चाहते हो तो, कभी भी इन धागों से रिश्ता मत तोड़ना.."*
*धागे और पतंग जैसे जुड़ाव* *के सफल संतुलन से मिली हुई ऊंचाई को ही 'सफल जीवन कहते हैं*.."
* नूतन
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*💐 ईश्वर
*भादवी बयार को गले लगाइए शुभकामनाएं*
आज कौन सी बात कहूं
पिछले चार वर्षों से आप
पढ़ पढ़ कर ऊब गए होंगे
आशुकविताएं आती हैं
चुपके से मौसम बदल जातीं हैं
अब देखिए महसूस कीजिए
भादो की उमस और अंगड़ाई
जल थल की खबरें घर आई
डूबा है शहर डूबे गांव भाई
राजपथ हो या पगडंडी
पानी पानी जैसे जल भरा हांडी
बाहर भादो भीतर शब्द
बजा देते हैं जलतरंग
*लता प्रासर*
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*कलयुग के वचन*
मैं तो लेती वचन पिया से
प्रियवर तुमको आना होगा।
इक जनम नहीं ,सातों जन्मों
पति का धर्म निभाना होगा।
कलयुग में हैं रात अमावस
चांदनी रातें नहीं होती।
एक नहीं, हैं सहस्रों राक्षस
मैं गहरी नींद नहीं सोती।
रावण डालें बुरी नजरिया
रघुवर सबक सिखाना होगा।
इक जनम नहीं सातों जन्मों
पति का धर्म निभाना होगा।।
है द्रोपदी जीवन में पिया
सौतन कभी नहीं लाओगे।
निरे दुशासन भरे धरा पर
दाओ पर नहीं लगाओगे ।
चीर -हरण देखो जो अर्जुन
गांडिव तुम्हें उठाना होगा।
इक जनम नहीं सातों जन्मों
पति का धर्म निभाना होगा।।
मुश्किल में कहीं रात बितालूं
पिया मन मेला न कर लेना।
नियति खेले खेल कोई तो
तुम गांठ न मन में धर लेना।
गर विश्वास तनिक हो मुझ पर
बिन परीक्षा अपनाना होगा।
इक जनम नहीं सातों जन्मों
पति का धर्म निभाना होगा।।
अंजाने में हो जो गलती
प्राणाधार हाथ उठाना न।
देख सुरा सी स्वप्न सुंदरी
तन-मन भी तनिक डिगाना न ।
रुक्मण भी मैं , राधा भी मैं
मुझपर प्रेम लुटाना होगा।
इक जनम नहीं सातों जन्मों
पति का धर्म निभाना होगा।।
*सीमा शिवहरे "सुमन"*
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[
कृष्ण प्रभु ने अवतार लिया,कर्म सिद्धांत बताकर जग जीवों को तार दिया
ओहो,,,ओहो,,,ओहो,,,ओहो,,,
गोपाल मेरा पालने में झूले रे,,,
गोपाल मेरा पालने में झूले रे,,,
साँवला, सलोना कान्हूडा मेरा
पालने में झूले रे,,,यशोदा मैया,,लोरी गाये,सुलाएरे,,,,
गोकुल धाम में झूला सज़ा, झुलाए रे गोप गोपियां
हरे भरे पेड़ पर ऊंची लटकाई
दही हंडियां
दही हंडिया टूटते ही,दर्शन कर मन डोल रहा,उस कान्हा में
कुछ पागत है,कुछ झूमत है
आओ ,गाओ,खुशी के गीत
आलकी की पालकी जय कन्हैय्या लl
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बुंदेली गीत
-------
जुमले रोज उछालें
*
संसद-पनघट
जा नेताजू
जुमले रोज उछालें।
*
खेलें छिपा-छिबौउअल,
ठोंके ताल,
लड़ाएं पंजा।
खिसिया बाल नोंच रए,
कर दओ
एक-दूजे खों गंजा।
खुदा डर रओ रे!
नंगन सें
मिल खें बेंच नें डालें।
संसद-पनघट
जा नेताजू
जुमले रोज उछालें।
*
लड़ें नई,मैनेज करत,
छल-बल सें
मुए चुनाव।
नूर कुस्ती करें,
बढ़ा लें भत्ते,
खेले दाँव।
दाई भरोसे
मोंड़ा-मोंडी
कूकुर आप सम्हालें।
संसद-पनघट
जा नेताजू
जुमले रोज उछालें।
*
बेंच सिया-सत,
करें सिया-सत।
भैंस बरा पे चढ़ गई।
बिसर पहाड़े,
अद्धा-पौना
पीढ़ी टेबल पढ़ रई।
लाज तिजोरी
फेंक नंगई
खाली टेंट खंगालें।
संसद-पनघट
जा नेताजू
जुमले रोज उछालें।
*
भारत माँ की
जय कैबे मां
मारी जा रई नानी।
आँख कें आँधर
तकें पड़ोसन
तज घरबारी स्यानी।
अधरतिया मदहोस
निगाहें मैली
इत-उत-डालें।
संसद-पनघट
जा नेताजू
जुमले रोज उछालें।
*
पाँव परत ते
अंगरेजन खें,
बाढ़ रईं अब मूँछें।
पाँच अंगुरिया
घी में तर
सर हाथ
फेर रए छूँछे।
बचा राखियो
नेम-धरम खों
बेंच नें
स्वार्थ भुना लें।
***
*संजीव वर्मा सलिल
==============================
आस कोई जगाते चलो
पाँव आगे बढ़ाते चलो
दूर होंगे सभी के गिले
भाव ऐसे बनाते चलो
जा रहे हो अगर हाट में
मुख अभी तो छुपाते चलो
कौन सोया जहाँ में अभी
नींद सबकी उड़ाते चलो
छूट ना जाये अपने कहीं
लाड़ सबसे लड़ाते चलो
ना गया हाथ से मामला
पाठ सबको पढ़ाते चलो
टूट ना जाय सपने कभी
ख्वाब ऐसे सजाते चलो
देख लो गर 'परिंदा' कहीं
प्रेम उससे जताते चलो ।।
*राम शर्मा परिंदा
मनावर जिला धार मप्र
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बंसी की धुन सुन नाचे ग्वाल गोपियाँ
कान्हा ने जनम लिया मनाओ आज खुशियां ,
दधि नवनीत छाँछ से स्नेह सिक्त होकर
मन की गाँठ खोल सब तोड़ों ये मटकियाँ ।।
कंस के फनों पर रास करने वाले अतुल्य कान्हा के जन्म दिवस के अवसर पर आप सभी को मिश्री भरी शुभकामनाय
*डॉ करुणा
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मुरली मधुर बजा जा
भीगा ॒भीगा है समां ऐसे में तुम कहां
मेरे कृष्ण कन्हैया आ जा ं मुरली मधुर बजा जा।
सावन की बहारें आईं हैं ं हर फूल ॒कली मुस्काई है
मुरली मधुर बजा जा ।
बागों में पड़ गए हैं झूले ं आ हिल-मिलकर झूलें
आकर झूला झुला जा।
ठंडी-ठंडी पवन चले है ं आकाश में बिजुरी चमके है
बूंदों का त्योहार मना जा।
कब से बाट देख रहे ं नैना रास्ता निहार रहे
आकर दर्शन दिखा जा।
तुम बिना सूना सारा चमन ं दिल को लगी तेरी लगन
मन की प्यास बुझा जा।
* नीति अग्निहोत्री
५७ साईं विहार इन्दौर म प्र
स्वरचित है ।
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शीर्षक कृष्ण जन्म ।
विधा कविता ।
बृज मे बटत बधाई
जन्मे कुअँर कन्हाई ।
आधी रात घनी बरसात,
जमुना थी उफनाई ,
जन्मे कुअँर कन्हाई ।
कारागृह के बंद द्वार
बिन चाबी ताले खुल गये
अदभुद लीला रचाई ।
जहाँ जन्म लिया वहां
पिया दूध नहीं ,
जहां दूध पिया वहां
लिया जन्म नहीं ,
दो दो माता ने खुशियां
मनाई ।
जन्मे कुअँर कन्हाई ।
कंस मामा का करने सफाया ,
रची काना ने ये ऐसी माया ,
धन धन प्रभु की चतुराई
शोभा बरनी न जाई ,
अदभुत लीला रचाई ।
*मनोरमा जोशी
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: श्री कृष्णा
अखंड अनंत ब्रम्हाण्ड
के शाश्वत रचयिता
कण कण में विराजित
सर्वव्यापी नायक
जिसकी लीलायें
मानव अंश में व्याप्त
होकर जन जन प्रसारित
श्री कृष्ण की लीलाये
वे अनंत योगी अंतर्यामी
निष्काम कर्मयोगी
जिनकी लीलाये है
अपरंपार जन के नायक
समाजवादी दोस्ती का
निर्भभयन करने वाले एक
अच्छे सखे असंख्य ह्रदये
में बसे श्री कृष्णा
एक योद्धा एक नितीयक
एक कुटनीतियाग एक भाई
अनंत नामो से सुशोभित
प्रेम की अप्रतिम प्रतीति
अनंत प्रेम सद्भाव के प्राणेता
उनके जन्म दिवस पर हार्दिक
बधाई हो समस्त प्राणियों को
*शिव कुमार दुबे इंदौर
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कृष्ण जन्माष्टमी पर
______&
ओ कान्हा ,आओ ना
टेर लगाते ,सुन जाओ ना
तुमने ही तो कहा था
जब-जब मेरी जरूरत होगी
मैं धरती पर आऊँगा
तेरे कष्ट सब मिटाउँगा
मुसीबत में है भारतवासी
कोरोना विपदा आई अच्छी खासी
देर मत लगाओ ,आ जाओ
संकट से कान्हा हमें बचाओ
आताताई कंस को तुमने मारा
गीता का ज्ञान देकर सबको तारा
अब हमको भी तारो ना
महामारी से छुटकार दो ना
गाएंगे तुम्हारी आरती
सजाएँगे तुम्हारी झांकी
हाथी घोड़ा पालकी
जय कन्हैया लाल की
स्वरचित
*उषा गुप्ता
इंदौर
=======================
श्री कृष्ण
माखन चुरा कर खाए कन्हैया बंसी की धुन पर नाच नचाए कन्हैया🙏🌹ग्वाल गोपी दौड़ी दौड़ी आए,,, मधुर धुन सबके मन को लुभाए🌷🌷
रूप तेरा सलोना प्यारा है,,, मंत्रमुग्ध मोर पाखी निराला है💐💐 पूजती जिन्हें दुनिया सारी हरे कृष्ण हरे मुरारी🌷
खुशियां मनाओ जन्मदिन की,,, जिसने प्रेम का रास्ता दिखाया🌹 वसुधा को दुखों से मिटाया,,, बड़े-बड़े राक्षसों को मार भगाया🌹🌹
मुरली मनोहर जमुना तट पर विराजे🌷 कानन कुंडल मुरली साजे 🌷मोरपंखी माथे बिराजे🌷 पूजतीहै दुनिया सारी,,,, ऐसे कान्हा के गुण गाजे🙏
सोलह
कलाओं में प्रवीण है योगीराज श्री कृष्ण निपुण है💐 राधा रानी के सरताज हैं,,, ऐसे कन्हैया का जन्म आज है💐
बोलो श्री कृष्ण कन्हैया लाल की जय🌹
*सुषमा शुक्ला इंदौर
==================================
मेरे मालिक मेरे खुदा तुम हो
मेरी धड़कन की हर सदा तुम हो
साँस आती जाती रहती है
मेरी साँसों की हर अदा तुम हो
मेरी आँखे तुझसे कहती है
इबादत इश्क़ की इब्तिदा तुम हो
वक्त तन्हा साथ रहता है
मेरे ख्वाबों की मयकदा तुम हो
हालत दिल के "उदय"कैसे कहूँ
पास रहकर "कान्हा जुदा तुम हो
अजय सिंह"उदय"
* प्रभा तिवारी
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