शुभ संकल्प समूह द्वारा आनलाइन विघ्न हारी,कल्याणकारी
लगते कितने मनोहारी गणेश जी,का आह्वान कार्यक्रम सम्पन्न
=======================
शुभ संकल्प समूह का आनलाइन द्वारा गणेश उत्सव का कार्यक्रम प्रारम्भ हुआ ,डॉ सुनीता श्रीवास्तव ने बताया कि इस कार्यक्रम में समूह के सदस्यों ने उत्साह से भाग लिया ,कार्यक्रम में गणेश जी के विषय को लेकर काव्य पाठ भी आयोजित किया गया जिसके प्रमुख अंश निम्नलिखित है--
गजानन गणपति देवों में प्रथम पूज्य कहलाते हो,
अपने सब भक्तों के बिगड़े कारज पल भर में बनाते हो।
*नीलू सक्सेना
======
सुधारो जी काज।.
आओ पधारो म्हारे, गजानन महाराज।
आओ पधारो म्हारे ,गजानन महाराज।
*माया ( नारायणी) बदेका
=======
गौरीसुत लम्बोदर
सेवा स्वीकार करो
लाई हूँ मोदक मैं
मोदक स्वीकार करो
* *डॉ. आभा माथुर*
====
विघ्न हारी,कल्याणकारी,
लगते कितने मनोहारी,
मंगलकारी,चमत्कारी,
लीला तेरी कितनी निराली।
*नवनीत जैन
==
वक्रतुंडा तू, एक दंता हे सिद्धिविनायक
सद्बुद्धि के दाता, ध्यावे सर्वप्रथम मंगल दायक
हर आंगन चरण धरो हे गणनायक
रिद्धि सिद्धि के हो दाता तुम
घायल हरमन के हो ज्ञाता तुम
*प्रिती धीरज जैन
-===
गजानन सुनलो हमारी पुकार।
गजानन लाओ खुशियां अपार।।
विघ्नों के हर्ता हो कष्टों के हर्ता हो
मंगलदायक तुम सुखों के कर्ता हो
*आशा जाकड़
====
सुखकर्ता दुखहर्ता बप्पा मोरया की तरह-तरह की मुर्तियां देखकर मन प्रसन्न होता,बप्पा मोरया एक ही है पंरतु कलाकार उन्हें कितने विविध रूपों में ढालता है,हर एक मुर्ति में एक अलग ही छवि देखने को मिलती हैं जैसे गणाधिपति खुद ही बता रहे हो आज मुझे इस रंग के कपड़े पहनाना कपड़ों से मेल खाती हुई पगड़ी या साफा, आज तो दरबार में मुकुट ही पहना जाएगा या आज मैं सिर ढंकना हि नहीं चाहता
*स्वाति वाड़गे (वनकर)
=======
श्रद्धा भाव से करें हम सेवा
भर देते हैं उसकी झोली देवा
कर दो सभी मनोरथ पूर्ण
*पूनम शर्मा
=========
हे कल्याणकारी
आपको कोटि-कोटि प्रणाम
साष्टांग दंडवत् ,और अभिनंदन गणेशोत्सव समिति का जिसके सदस्यों ने धर्मक्षेत्र में साहसी, दयापूर्ण निर्णय लिया।
और भक्त जनों पहली बार गणेशजीने स्वयं की आँखों से स्वयं का विसर्जन देखा था।
*अरुणा खरगोनकर
========
वक्रतुण्ड महाकाय हो बुद्धि दायक
दूर्वाभिषेक करवाते सिद्धि विनायक
आप ही सखा और बंधु हो हमारे
आप के बिना अवनीश हमें कौन तारे
*मंजिरी पुणताम्बेकर
=================
गणपति बप्पा जय हो तुम्हारी ,
नमन आपको करते है ।
*मनोरमा जोशी स्वरचित ।
===================
गौरी के लाल हैं गणेश ।
प्रथम पूजे जाते हैं ।
उनकी छवि निराली हैं ।
मूस की सवारी है जिनकी ।
*चारूमित्रा नागर
=====================
भक्तों के संकट हर लेते ,
कुछ न रहता शेष।
मंगल कार्य में प्रथम पूजनीय
हो भगवान गणेश।
*अचला गुप्ता
============
हर बुधवारी
सेवा तुम्हारी
पूजा स्वीकारो
देवा हमारी
* मधु टाक "इन्दौर"
=====================
रूप सलोना तेरा निहारूँ
झूम झूम आरती उतारूँ
जय गणेश जय गणेश।
जय वीर सुत महेश।।
* रीतु प्रज्ञा
==========
कैसे बने निरोग,अधुरा सपना।
जाने कितने नाग ,इसको डसेरे।
पधारो गजानंद, आज घर मेरे।।
* रश्मि सक्सैना
=======================
जाग्रति का शंख नाद कर दो
आतंक को मिटा दो विनायक
शत्रुओं का कर दीजिए विनाश
*डा अंजुल कंसल"कनुप्रिया"
=======================
प्रथम पूजते आपको हैं दाता विशेष
जय गणेश जय गणेश
इनको दूबा हरी चढ़ाओ
भोग मोदक का लगाओ
*शालिनीं
================
गणेश जी की मूर्ति या उनका आकार हमे क्या सन्देश देता है आप सबको यही बताना चाहती हूं 1 गणेश जी का बड़ा शीश बुध्दि का प्रतीक है 2 गणेश जी के सूपड़े कि तरह में हमे यह शिक्षा देते है जिस तरह सूप से अनाज फटकने पर अच्छी चीज रख लेता हैं ओर कचरा बाहर गिर देता है उसी तरह हमे अच्छाइयों को ग्रहण करना चाहिए ओर बुराई रूपी कचरे को मन सें निकाल देना चाहिए ,जिस तरह हाथी की सूंड होती है जब भी हम हाथी को कुछ खाने को देते है तो पहले वह महावत को देता है क्योंकि महावत ही हाथी की देख भाल करता है उसी टर गणेश जी की सुंड हमे यही शिक्षा देती है कि जो भोजन हम करते है पहले उसे अपने परमात्मा को अर्पण करे क्योंकि ये सब हमे उन्हीं की कृपा से मिलता है 4गणेश जी के हाथ में मोदक है जिसका अर्थ होता है मुदित अतार्थ प्रसन्न रहना ,हम सब भी हमेशा प्रसन्न रहे ,बूंदी के लड्डू का भी भोग उन्हे लगाते है वह हमे सन्देश देती है कि जैसे एक एक बूंदी जुड़कर एक मिठाई ओर लड्डू का रूप लेती है उसी तरह हमे भी मिलजुलकर रहना चाहिए
*"साधना श्रीवास्तव "(वनकर)
=====================
ज्ञाता सर्वत्र,
मुझ पामर भक्ति,
दे ऐसी शक्ति,
जय देव दर्शन,
मुझ आशा पूरण।
*प्रभा जैन इंदौर
==================
शुभमय करे हर जन , मन को
पावन पर्व गणेश चतुर्थी
करे मंजू नमन ।
*मंजू गुप्ता
=================
पूजा तुम्हारी करे' पहले सदा गौरी लालन
तारणहार ं कर दे पार
भजे दिन - रात निरन्तर ं तुम ही कण-कण के अंदर
देवों में पहला नम्बर ं लगे ना कांटा कंकर ,,,,
* नीति अग्निहोत्री
===============
एकदंत, लम्बोदर गणों केस्वामी हैं,
मोदक अति प्रिय ,मूषक सवारी है ,
गौरी नंदन पुत्र का नाम विनायक है ,
प्रथम पूज्य गणपति जी को प्रणाम है ।
*श्रीमती शोभा रानी तिवारी,
==========
जिसका मै रसपान करू
मै भारत की बेटी हूं क्यों ना
मैं अभिमान करू......
*अर्पणा तिवारी
====================
प्रथम देव है
बोलती निकली टोलियां
सभी बजाते तालियां
हर कोई बोले बोलिया
गणपति बप्पा मोरया।।
*उषा गुप्ता
==========================
है जग वंदन
गिरजा के नंदन
काटो हमारी
चौरासी बंधन
विघ्न विनाशक
* मधु टाक "इन्दौर"
==========================
जयति जयति गणपति देवा
मस्तक प्रशस्त बुद्धि के दाता
दूरदर्शिता दिव्य नयन समाता
कर्ण विस्तरित दुःखों के ज्ञाता
*सरला मेहता
==================
लड्डुओं का थाल सजा लो
बप्पा को भोग लगायेगें
हम भोग लगायेगें। हम झूम के नाचेगे। हम झूम के नाचेगे
हम मंगल गीत गायेगे।
गणपति बप्पा मोरिया।
* प्रभा तिवारी
=============================
हे गणेश गणपति खजराना अधिपति ,
भगवन हमें अब यूँ ना बिसराइये।
महादेव गौरी सुत कार्तिक अनुज तुम,
गजानन थोड़ी सी तो कृपा बरसाइये।
**रश्मि चौधरी*
*इंदौर*
======================
तेरी शरण तेरी कृपा
हे नाथ हम माँगे सदा
तीनो लोको में न कोई तुम जैसा
भक्त जनों को तुम हर्षातेकष्टों को सदा दूर भगाते
शत शत करते हैं नमन
गजानन की भक्ति में हो मगन।
* वन्दना अर्गल
=========================
नमामि ते गजानन अनंत मोक्ष दायकम्
समस्त विघ्न हारणम्, , समस्त पाप विनाशम्
तु सुखाकंर मम प्रिय गणाधिपम
नमामि ते विनायकम्, हृदय कमल निवासिकम्
* मंगला सरोशे
==============================
भगवान गणेश अपने तेज़ बुद्धिबल के प्रयोग के कारण देवताओं में सर्वप्रथम पूजे जाने लगे. तब से आज तक प्रत्येक शुभ कार्य या उत्सव से पूर्व गणेश वन्दन को शुभ माना गया है. गणेश जी का पूजन सभी दुःखों को दूर करने वाला एवं खुशहाली लाने वाला है. अतः सभी भक्तों को पूरी श्रद्धा व आस्था से गणेश जी का पूजन हर शुभ कार्य से पूर्व करना चाहिए
* प्रमिला सक्सेना
======================
एकदंत, हाथ लड्डू,मूषक सवार
मूरत लुभानी जिन परश्रद्धा अपार
प्रथम प्रवेश कर करें शुभ कार्य
भक्तों का करें जीवन उद्धार
* प्रेरणा सेन्द्रे
=============================
जय गणेश
हम सबके ईश
नवाते शीश।
हे विघ्नहर्ता
रिद्धि सिद्धि के संग
लाए आनंद।
*स्मिता जैन
======
श्रीरामचरित्रमानस में गोस्वामी तुलसीदास कहते हैं- ‘शिव और पार्वती का विवाह हुआ तब विवाह के पूर्व गणपति की पूजा की गई । तो कैसे गणपति तो शिव पार्वती के पुत्र है तो तुलसीदास संकेत देते है कि श्री गणपति बुद्धि और विवेक के देवता निराकार स्वरुप में थे जिन्हें साकार स्वरुप मंे स्थापित किया गया।’ वह हर युग में रहते हैं और अपनी सद्गुणों के माध्यम से लोककल्याण करते हैं।
*डा. सुरेखा भारती
====
No comments:
Post a Comment