Friday, March 13, 2020

भयभीत हूँ मैं

  नहीं बता सकता कितना भयभीत हूँ मैं
        कहीं  कुछ शंकीत भी हूँ मैं
           करोना के नाम से ही
        बहुत ही आतंकित भी हूँ मैं ।

 अपने ही घर में अब कैदी बन बैठा हूँ मैं
    पता नहीं कैसे सम्हल पाऊँगा मैं
    चलेंगे कैसे अब मेरे शतरंजी मोहरे 
  बिन आय.पी.एल.कैसे जी सकता हूँ मैं ।

  खरीददारी भी कब की कर चुका हूँ मैं
     मंडियों में  निलामी करा चुका हूँ मैं 
        अब यह अरबों  का नुकसान
      ए करोना  कैसे उठा सकता हूँ मैं ।

        स्वार्थ की पट्टी संग रहता हूँ मैं
 सब कुछ जानकर भी गांधारी बन बैठा हूँ मैं
   कुछ भी हो जाए चाहे  चली जाए चमडी
      दमडी को कैसे छोड़ सकता हूँ मैं ।

        भयभीत हूँ मैं भयासक्त हूँ मैं
  सख्त मिजाज शासक से आतंकित हूँ मैं
       आय.पी. एल. रुक मत जाना
   तेरे रुकने की आशंका से भयभीत हूँ मैं ।

            बी.सी.सी.आय. हूँ मैं
    दौडा लपका के कमाई करता हूँ मैं
       लग जाए चाहे दाग मेरी साख पर
 पर कमाई का धंधा कैसे रोक सकता हूँ मैं ।

      सौ. राधिका इंगळे
           देवास

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